फरियाद बन के

फरियाद बन के निकली मेरी वफ़ा तेरी गली में
कौन सुनता मेरे दिल की सदा तेरी गली में

यूँ तो बस आवाज़ हूँ एक बुतखाने की
कौन बख्सेगा यूँ मेरी खता तेरी गली में

दरो-दीवार से लिपटी हुई एक तस्वीर सही
कौन मुड़ के देखेगा यहाँ तेरी गली में

बात दरियां की करों या समुन्दर की
डूब के देखेगा मुझे कौन भला तेरी गली में

मेरी आहट भी मुझे नागवारा गुजरी ‘अरमान’
मेरे सनाटों को सुनेगा कौन भला तेरी गली में
राजेश ‘अरमान’

Comments

2 responses to “फरियाद बन के”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Jai ho

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