आंगन तो खुला रहने दो………………….

झगड़ों में घर के, घर को शर्मसार मत करो

आंगन तो खुला रहने दो, दीवार मत करो।

मारे शर्म के आंख उठा भी सकूं न मैं

अहसानों का इतना भी कर्जदार मत करो।

हर ओर चल रही हैं, नफरत की आंधियां

और आप कह रहे हो कि प्यार मत करो।

लफ्जों की जगह खून गिरे आपके मुंह से

अपनी जबां को इतनी भी तलवार मत करो।

हंसती हुई आंखों मेें छलक आये न आंसू

हर शख्स पे इतना भी तो एतबार मत करो।

—————–सतीश कसेरा

Comments

8 responses to “आंगन तो खुला रहने दो………………….”

  1. amit sharma Avatar
    amit sharma

    True words…..
    हंसती हुई आंखों मेें छलक आये न आंसू
    हर शख्स पे इतना भी तो एतबार मत करो।

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Amit Sharma

  2. Panna Avatar

    speechless expressions sir ji

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Panna

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

  4. Satish Pandey

    वाह वाह

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