मजबूरियाँ

कुछ तो मजबूरियाँ तेरी भी रहीं होंगी कुछ तो मजबूरियाँ मेरी भी रहीं होंगी ,
सब की मजबूरियों में मजबूर थे हम तेरी नजदीकियों से दूर थे हम ,
अरे जाओं ज़नाब तुम क्या समझोगे दर्द ए दिल को हमारे ,
अपनी खुशियों मे मशगूल थे तुम अपने गमों मे ही चूर थे हम ,

Comments

3 responses to “मजबूरियाँ”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    kya baat he…very nice

    1. Ushesh Tripathi Avatar
      Ushesh Tripathi

      Thank you

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