सरिता पावन हो गई स्निग्ध खुश्बू सी वन में छाई है
तु कौन रमणिका जल क्रिडा को चली कहां से आई है!
सारा उपवन नतमस्तक हो सादर अभिनंदन करता है
तन मन की तपन बढ गई तुने पानी में आग लगाई है!!
उपाध्याय…
मुक्तक
Comments
One response to “मुक्तक”
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बहुत अच्छा मनोज जी
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