मुक्तक

जमीं वही है मगर लोग है पराये से
जो मिल रहे है लग रहे है आजमाये से!
शफक नही नकॉब में फरेब है मतिहीन
सभी दिखते मुझे हमाम में नहाये से!!
उपाध्याय…

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Sridhar Avatar
    Sridhar

    Behtareen

  2. राम नरेशपुरवाला

    उत्तम

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