ख्वाहिश ॥।

क्यों  रही ख्वाहिश एक लडके की ॥

हमेशा लडकी को कहाँ ॥

कभी चाँद कहाँ तो कभी गुलाब ॥

कभी जलता दिया तो कभी महकती फीजाए॥

चलती पवन तो कभी समुद्र का शाहील ॥

कभी धन लक्ष्मी तो कभी घर की नीव ॥

हर लवज से नबाजा पर क्यो खामोश हैं ॥

जब ख्वाहिश  हुई लड़के की ॥

जिन्दा ही मार दिया ॥

न चाँद ,गुलाब ,धन,नीव,

शाहील ,हवा ,दियाँ  नजर आया ॥

बस   एक ख्वाहिश  ॥

मन की बात ॥

रेनू गोयल ॥

 

Comments

5 responses to “ख्वाहिश ॥।”

  1. Sonit Bopche Avatar
    Sonit Bopche

    aapki vicharsheelta ko pranam hai. bahut sundar.

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  4. Abhishek kumar

    Good

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