हिन्द के चूल्हे की रोटी खा रहे फिर भी,
बांध पाक के घुंघरू ये गा रहे फिर भी,
इन्हें मुजरा ही आता है भजन क्या जाने,
तभी ज़ाकिर,अफ़जल के गुण गा रहे फिर भी।।
मेरा एक नही सौ बार खून खौलता है,
इन्हें अपने ही घर में क्यूँ भय लगता है,
अरे बेवकूफ औलादो कभी जाना क्या तुमने,
क्या कुरान कहता है क्या हिंदुस्तान कहता है।।
शेरे-वतन के वीरों ने है सम्हाला तुमको,
बाढ़ हो तूफ़ान हो और दुश्मनों से तुमको,
तुम खुद जल रहे हो जला रहे क्यूँ सबको,
ये देश है हमारा और हम रत्न है इसके ।।
जब आती है मुसीबत आके जिनपे गिरते हो,
फिर सम्हल के उन्ही पे पत्थर क्यूँ फेंकते हो,
जिस थाली में खाते हो क्यूँ उसको तोड़ते हो,
फिर भूख भी लगेगी ये क्यूँ न सोचते हो।।
© अश्विनी यादव

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