हाँ रहने दो

भ्रांति की अविरल धारा बहने दो,

जिजीविषा काया की रहने दो,

खंडित जीवन की अभिलाषा,

जो कुछ शेष है  सहने. दो,

हाँ, रहने दो,कुंठित मन की कामना,

हास-परिहास की भावना,

जीवन चक्र की सतत प्रताड़ना,

मृगतृषित  मन को सहने दो,

हाँ, रहने दो ,इस क्षण में,

जीने  की  लालसा,

विचलित मन की साधना,

आकांक्षाअो  की आराधना,

जो कुछ शेष है,रहने दो,

हाँ, रहने दो, भ्रांति की,

अविरल धारा बहने दो ।।

https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/07/18/

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

परिहास बनी

परिहास बनी पल दो पल के, उन्मादित पलों को, प्रेम समझ परिहास बनी, कोमल एहसासों को अपने, पाषाण में तराश  रही, क्षणभंगुर जगत में, अमरता…

Responses

New Report

Close