दोस्ती प्यार का मीठा दरिया है

आओ, मुझमें नहाओ,
डूबकी लगाओ
प्यार का सौंधा पानी
हाथों में भर कर ले जाओ।

आओ,
जी भर कर गोता लगाओ,
मौज-मस्ती की शंख-सीपियाँ
जेबों में भर कर ले जाओ।

दोस्ती का दरिया
गहरा है, फैला है
इसमें नहीं तैरती
धोखे की छोटी नौका
कोशिश की तो
बचने का नहीं मिलेगा मौका।

– Puneet

Comments

3 responses to “दोस्ती प्यार का मीठा दरिया है”

  1. स्मृति (फाल्गुनी) Avatar

    यह फाल्गुनी यानी मेरी कविता है जो वेबदुनिया में 2008 से लगातार प्रकाशित है। कृपया कवयित्री का नाम भी दें या कविता हटाएं …स्मृति (फाल्गुनी)

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