Tag: दोस्ती पर कविता

  • *दोस्ती*

    *****हास्य – रचना*****
    कछुए और खरगोश की,
    पांच मील की लग गई रेस
    तीन मील पर खरगोश ने देखा,
    कछुआ तो अभी दूर बहुत है
    थोड़ा सा आराम करूं
    ना…ना वो सोया नहीं
    ये पुरानी नहीं, ये तो है कहानी एक नई
    खरगोश ने लगाया दीवार पर एक टेका
    उसे सामने ही दिख गया एक ठेका
    दो-तीन लिटिल-लिटिल
    पीने के बाद…
    खरगोश को आई, कछुए की याद
    कछुआ भी धीरे-धीरे , आ गया करीब
    खरगोश ने कहा कछुए से
    थोड़ी सी लिटिल-लिटिल पीने से
    थकान दूर होती है….
    कछुआ भी मान गया
    और लगा ली लिटिल-लिटिल
    दोस्ती देख कर खरगोश की,
    कछुए के चेहरे पे आया नूर
    भर के बोला वो..
    अपनी आंखों में सुरूर
    मैं लोगों की बातों में आया,
    तुम संग मैं क्यूं रेस लगाया
    हम दोनों दोस्त रहेंगे सदा
    मिलते रहना ,फोन भी करेंगे यदा-कदा
    दोस्ती की फिर खाई कसमें,
    दोस्त हुए फिर दोनों पक्के
    पी कर थोड़ा लिटिल-लिटिल

    *****✍️गीता

  • दोस्ती

    दोस्तों के नाम पर
    कुर्बान हर पल
    भीतर से हृदय से
    आवाज गूंजी है,
    दोस्ती तो ताकत
    होती है सबकी
    दोस्ती तो जीवन की
    अनमोल पूंजी है।

  • दोस्ती और मुहब्बत

    मुहब्बत में कभी-कभी,
    घर छूटते हैं
    मुहब्बत में अक्सर ही,
    दिल टूटते हैं
    दोस्ती की देखो,
    निराली ही शान है
    दोस्ती के सिर पे,
    ना कोई इल्ज़ाम है
    मुहब्बत के मैं, विरुद्ध नहीं,
    बशर्ते मुहब्बत हो शुद्ध और सही
    एक बार मुहब्बत,
    हो जाए किसी से
    फ़िर दुबारा भी हो,
    वो तो मुहब्बत नहीं है
    दोस्ती का रिश्ता,बड़ा ही पाक है
    दोस्ती के दामन पर, ना कोई दाग है
    एक बार ही मुकम्मल,
    हो जाए इस जहां में मुहब्बत
    ये ही क्या कोई कम बड़ी बात है
    हाथों में गर हाथ है किसी का,
    होली है दिन और दीवाली की रात है
    दोस्ती की अपनी अलग ही शान है,
    दोस्ती का कुछ अलग ही मान है ..

    *****✍️गीता

  • दोस्ती का नियम

    दोस्तों से कुछ भी,
    छिपाते नहीं हैं
    यही दोस्ती का,
    पहला नियम है
    छिपाए जाएं गम, खुशी
    गर दोस्तों से
    फ़िर वो दोस्ती ही कैसी
    ये तो नहीं, जानते हम हैं ..

    *****✍️गीता

  • दोस्ती

    आपकी और अपनी दोस्ती
    साबुन व पानी की तरह हो
    एक दूसरे का साथ देकर
    अपने भी और संपर्क में आने वालों के भी।
    दाग -धब्बे दूर कर दें

  • यही दोस्ती यही प्यार ?

    रास्ते कठिन है प्यार के, फिर भी मैने हिम्मत नहीं हारा।
    तुम तो थोड़े ही दूर चल के कहने लगे अब मैं जीवन से हारा।।

  • दोस्ती ना सही…

    दोस्ती ना सही,
    दुश्मनी तो मत निभाओ।
    चार बातें बनाकर,
    यूं ठहाके तो मत लगाओ।
    यूं तो दिल सबका दुखता है,
    उसे और ना दुखाओ।
    माना तुम काबिल हो ,
    अपने मुकाम पर।
    मगर मेरी काबिलियत पर ,
    यू सवाल ना उठाओ ।

  • ख़ूबसूरत है दोस्ती

    बहुत ही ख़ूबसूरत होती है दोस्ती,
    निज स्वार्थ से ऊपर होती है दोस्ती।
    कुछ रिश्ते मिलते हैं, हमें जन्म से,
    कुछ रिश्ते मिलते हैं, समाज की रीत से
    मगर निज चुनाव पर होती है दोस्ती ।
    इसीलिए तो सबसे उपर होती है दोस्ती..
    ……………✍️गीता……

  • याराना

    🌹🌹 Friendship Day special🌹🌹
    गजल:- याराना

    प्रेम से भी बड़ा बन्धन,
    सुकून आये दोस्ती में।
    कभी कृष्णा कभी अर्जुन
    याद आये दोस्ती में।

    अपनी जिंदगी से
    हार थक करके हर इन्सान,
    सभी परेशानियां और
    गम भूल जाये दोस्ती में।

    बना दे जिंदगी सुंदर
    निभाओ साथ जब दिल से
    यकीन करना बड़ा मुश्किल
    दग़ा गर कोई दे फिर से।

    दोस्ती है बड़े विश्वास
    और एहसास का बन्धन,
    निभाओ इसको तुम निःस्वार्थ
    हो विश्वास जब दिल से।

    मेरे मन के मंदिर में
    दोस्ती राज करती है,
    मेरे यार की मूरत
    ही मन में वास करती है।

    मेरे दोस्त और मुझसे
    है कुछ ज्यादा ही मीठापन
    साथ बस कुछ ही पल का है
    ये दुनिया बात करती है।

    कर्ण ने दुर्योधन से
    निभाया खूब याराना।
    रक्त के रिश्तों को तोड़ा
    निभाया खूब याराना।

    कन्हैया ने तो अर्जुन को
    गीता उपदेश दे डाला,
    उठा हथियार वचन तोड़ा
    निभाया खूब याराना।।

  • 🌹🌹याराना🌹🌹

    🌹🌹 Friendship Day special🌹🌹
    गजल:- 🌹🌹याराना🌹🌹

    प्रेम से भी बड़ा बन्धन,
    सुकून आये दोस्ती में।
    कभी कृष्णा कभी अर्जुन
    याद आये दोस्ती में।

    अपनी जिंदगी से
    हार थक करके हर इन्सान,
    सभी परेशानियां और
    गम भूल जाये दोस्ती में।

    बना दे जिंदगी सुंदर
    निभाओ साथ जब दिल से
    यकीन करना बड़ा मुश्किल
    दग़ा गर कोई दे फिर से।

    दोस्ती है बड़े विश्वास
    और एहसास का बन्धन,
    निभाओ इसको तुम निःस्वार्थ
    हो विश्वास जब दिल से।

    मेरे मन के मंदिर में
    दोस्ती राज करती है,
    मेरे यार की मूरत
    ही मन में वास करती है।

    मेरे दोस्त और मुझसे
    है कुछ ज्यादा ही मीठापन
    साथ बस कुछ ही पल का है
    ये दुनिया बात करती है।

    कर्ण ने दुर्योधन से
    निभाया खूब याराना।
    रक्त के रिश्तों को तोड़ा
    निभाया खूब याराना।

    कन्हैया ने तो अर्जुन को
    गीता उपदेश दे डाला,
    उठा हथियार वचन तोड़ा
    निभाया खूब याराना।।

  • दोस्ती

    तू दोस्ती करेगा
    पर एक शर्त मेरी,
    जब भी मैं हार बैठूँ
    तू साथ ही रहेगा।
    आ दोस्त आ गले मिल
    तेरे बिना मैं सूना,
    तेरा है दर्द मेरा
    चिंता न कर मैं हूँ ना।

  • दोस्ती

    ना गम है
    ना दर्द है
    जो बिताया दोस्तों के साथ
    वो ही सुनहरा वक्त है

    ना है कोई खून का रिश्ता
    फिर भी निभाते ये दिलवाले है
    एक दूसरे में खुश रहते
    ये मस्त मतवाले है

    चाहे दिन हो या रात हो
    कोई दुःख लगा ना पाए हाथ
    अगर दोस्तों का साथ हो

    कई सफल कहानियो के पीछे
    दोस्तों का भी साथ होता है
    जरुरी नहीं की हर बार
    औरत का ही हाथ होता है

    दोस्तों के बगैर
    जीना भी क्या जीना
    वो दोस्त ही क्या
    जो ना हो कमीना

    ज़िन्दगी बीत जाती है
    बस रह जाते है कर्म
    ज़िन्दगी जीना सीखा दे
    वो ही है दोस्ती का धर्म

    – हिमांशु ओझा

    Happy friendship day dosto🥳🥳🥳👍🏻🥰

  • दोस्ती

    कभी बुलाये प्यार से
    कभी बुलाये मजाक से
    ज़िन्दगी की हर घडी ये साथ देती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    दिल होवे गम में
    तो ये बात करे नरम में
    छोटी ख़ुशी में भी
    पार्टी मांगे जमके
    मूड चाहे जैसा हो ये मज़ाक करती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    किसी से हुई मारपीट हो
    किसी ने कर दिया चीट हो
    ये उसको भी पछाड़ देती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    ये ना बुलाये कभी नाम से
    दूसरा उड़ाए मजाक तो
    गया वो काम से
    हर बात में ये पास होती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    दोस्ती की रीत तो पुरखो से चली आयी है
    विभीषण जैसा मित्र पाकर श्री राम ने रावण पर विजय पायी है
    दोस्त हर वादा निभाता पूरा है
    दोस्त ही नहीं तो जीवन अधूरा है
    परिवार भेजे सही राह पे तो मंज़िल ये पहुँचती है
    दोस्ती होती ही ऐसी है

    हिमांशु के कलम की जुबानी

  • सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार (भाग -२)

    (आपने अगले पेज में पढा कि, अमित अपनी उलफत की दास्तां अपने दोस्त सुरेश को सुनाया। क्योंकि, अनिता के प्यार में वह पागल हो गया था। सुरेश अमित को किस तरह सही रास्ते पर ला कर खड़ा किया। आगे पढिए—-)
    ——————————–
    सुरेश -“वह तुम्हारा अमानत नहीं है। अपने को संभालो अमित। इस संसार में लड़कियां उसे ही चाहती है जिसके पास दौलत और गुण हो। गुण तभी जन्म लेगा जब तुम मन लगा कर पढाई में मेहनत करोगे। हर लड़की की एक सपना देखती है कि, उसका पति एक अच्छे एमप्लाएड हो ताकि, सुकून से दो वक्त की रोटी उसे खिला सके। आज तुम्हारे पास है ही क्या? सिवाए दुःख के।दोस्त, इस संसार में डूबता हुआ सुरज को कोई नहीं देखता। मै चाहता हूँ कि
    तुम एक नयी प्रभात बन कर उसे प्रभावित करो जिसने तुम्हें धिक्कारा है”।सुरेश के बातों का प्रभाव अमित पर गहड़ा पड़ा। बस उसी दिन से कुछ करने का जज्बा उसने ठान लिया। अनिता से अमित धीरे धीरे दूरी बनाने के प्रयास करने लगा। वक्त यों ही गुज़रता गया। अमित अच्छी पढाई के लिए वह शहर छोड़ दिया। जिस शहर में उसे नफरत ही नफरत मिला। एक नया जीवन शुरू करने के लिए वह दक्षिण भारत चला गया। वहाँ वह दिन में कहीं काम करता था और रात में पढाई किया करता था। उसका मेहनत व इमानदारी को देख कर एक सेठ अपनी कंपनी के प्रबंधक बना दिया। वह अपनी मेहनत व लगन से उस कंपनी को आगे बढाने का प्रयास करने लगा।
    (शेष हम अगले पेज में लिखेंगे। धन्यवाद दोस्तों)

  • सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार(भाग-१)

    अनिता नाम था। देखने में साँवली सलोनी। उसकी आँखें किसी गहड़ी झील से कम नहीं था। उसकी मुस्कान व अदा का क्या नाम दें, मेरे पास शब्द ही नहीं है। कुदरत ने केवल उससे गोरा रंग ही चुराया था। चंचल स्वभाव के कारण ही अमित उसे कब कहाँ क्यों और कैसे दिल दे दिया पता तक नहीं चला। वह हमेशा अमित के संग हंसी मजाक, लड़ाई झगडा कर लिया करती थी। कभी कभी एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। दो तीन दिन बाद फिर एक दूसरे को देख कर मुस्करा दिया करते थे। अनिता में बचपना कूट कूट के भरी हुई थी। कयी मर्तबा अपनी नजरों के किताब भी उसके सामने खोला मगर, वह पढने में नाकामयाब रही। अल्हड़पन में ही उसकी जवानी दो दगा़ बाजों के बीच फंसा हुआ था। वक्त यों ही गुज़रता गया। एक दिन अनिता कॉलेज से घर आ रही थी। अमित अनिता को रोकते हुए कहा -“अनिता ।ंमै तुम से कुछ कहना चाहता हूँ “।अनिता अपनी नजर दूसरे तरफ फेंकती हुयी –“बोलो”।अमित –“मैं…. मैं…… “।अनिता –“ए मैं मैं क्या लगा रखे हो। जल्दी बोलो मेरे पास समय नही है”।अमित -“मैं तुम्हें अपने दिल से चाहता हूँ। क्या मेरे लिए तुम्हारे दिल में कोई जगह है”?अनिता –“व्हाट नोनसेंस। कहीं तुम्हारा दिमाग खराब तो नहीं हो गया। प्यार मुहब्बत अपने से बराबर वालों के साथ होता है। तूम कहाँ और मैं कहाँ। अपने दिल से मेरा सपना देखना छोड़ दो। जीवन में कुछ कर लो अमित यदि यह समय गुजर गया तो हाथ मलते रह जाओगे। प्यार मुहब्बत ही हर इनसान का लक्ष्य नहीं होता है”। इतना सुनते ही अमित को गहड़ा झटका लगा। उसका दिमाग सुन्न हो गया। उस दिन से अमित अनिता से दूर रहने लगा। अमित अपनी जख़्म दिखाए तो किसको दिखाए। कुछ दिन गुजरने के बाद, एक दिन शाम के समय अमित अनिता को किसी गैर के साथ देखा। शायद वह गैर उसका अपना था। तभी तो दोनों एक दूसरे के हाथो हाथ रखे जीने मरने की कसमे खा रहे थे। आधा घंटा गुजरने के बाद वह अपनी बाइक से वहाँ से चल पड़ा। उसका चेहरा मैं देख नहीं पाया। क्योंकि वह अपनी पीठ मेरी ओर घूमा कर बाते करने में मगन था। अनिता जैसे ही अपने घर की ओर चलने लगी वैसे ही अमित उसे पुकारा –“जरा ठहरो “।अनिता –“तूम मेरे पीछे क्यों पड़े हो। मै तुमसे प्यार व्यार नहीं करती”।वह और आंसू के झील में डूब कर रह गया। अंत में उसने अपनी प्रेम कहानी अपने जिगरी दोस्त सुरेश को सुनाया। सुरेश –“तू कहीं पागल तो नहीं हो गया है। अगर वह तुम से प्यार नहीं करती है तो तुम्हें जबरदस्ती भी करने का कोई हक नहीं…….. (शेष अगले पेज में इस कहानी के अंत करेंगे। धन्यवाद)

  • दोस्ती

    फूलों की खुशबू की भाँति
    महक जाए जीवन की डाली
    तारों की चाँदनी की भाँति
    रोशन हो दुनिया तुम्हारी
    सूरज की तेज़ की भाँति
    प्रकाश ही प्रकाश हो जीवन मे तुम्हारी
    नीले अम्बर की चादर की भाँति
    रंग भरी हो दुनिया तुम्हारी
    कृष्णा सुदामा के जैसी हो
    अपनी दोस्ती मेरी प्यारी।।

  • दोस्ती से ज्यादा

    hello friends,
    कहने को तो प्रतिलिपि पर ये दूसरी कहानी है मेरी लेकिन सही मायनो मे ये मेरी पहली कहानी है क्योकि ये मेरे दिल के बहुत करीब है चलिये आपका ज्यादा वक्त जाया नी करते और कहानी शुरू करते है

           आज मै बहुत खुश हू और वजह भी जायज है यार आखिर इतने वक्त बाद घर वापिस जो जा रही हू  5 साल बाद अपने देश India वापिस जा रही हू, हाँ क्यों India मेरा घर नही हो सकता क्या मेरे लिए तो India ही मेरा पहला घर है माँ पापा का घर भी है
    सॉरी बातों बातों मैं आपको अपना नाम बताना तो मैं भूल ही गई , मेरा नाम है खवाहिश, हाँ वही जो हर किसी कि कुछ ना कुछ होती ही है चलिए आपसे बाते करते करते मै airport से घर भी पहुंच गई वैसे London मे रहना भी किसी हसीन ख्वाब से कम नही था पर घर कि बात ही कुछ ओर होती है घर पर जाते ही सबसे पहले कौन याद आता है माँ, मैने भी जाते ही उन्हे ही पुकारा …..
    माँ …………..कहाँ हो आप ?????
    माँ ……आई बेटा ……तेरे आते ही रौनक वापिस आ गई
    मैं भी कम नौटंकी थोडी हूं वही अपने पुराने dialogues
    हाँ हाँ सब पता है मुझे कितना miss करती थी आप मुझे तभी तो कभी मिलने नी आई
    ये क्या आते ही तेरी शिकायतें शुरू हो गयी ….खुद ही पहले मना करती है आने से ओर अब खुद ही शिकायत करने बैठ गई
    सॉरी माँ मैं तो बस मजाक कर रही थी आपको तो पता ही है मेरा
    हाँ हाँ सब पता है मुझे तेरा ओर तेरे पापा को भी
    माँ आप फिर से पापा को बीच मैं ले आई
    तो ओर क्या करूँ तुम दोनों हो ही ऐसे
    अच्छा ठीक है हमारी बात तो होती ही रहेगी ये बताओ पापा कहाँ है
    वहीं जहाँ होना चाहिए …..office….दुनिया मैं एक ही जगह बनी है उनके लिए तो
    अरे कौन है जिसने हमें याद किया …….
    पापा …..आप कब आये ……
    बस अभी जब आपकी माँ हमारी बुराई कर रही थी
    माँ …….तो कौन सा कुछ गलत कह दिया सही तो कहा है
      
         और बस फिर शुरू हो गई कभी ना खत्म ना होने वाली नोंक झोंक …..

    आज के लिए बस इतना ही ……तो ये थी मेरी ओर मेरी छोटी सी family……

    बाकी हम पढेंगे next part me…see u soon friends…. I hope आपको मे अच्छे से entertain कर सकूं ……

        

                    उसी शाम मैं अपनी favorite जगह पहुंची जहाँ मैं अक्सर जाया करती थी आेर  वो जगह थी मेरठ सिटी पार्क , जी हाँ मै मेरठ की रहने वाली हूं ओर यहाँ का पार्क मेरी पसंदीदा जगह में से एक है यहाँ एक अलग ही सुकुन है हर जगह हरियाली,हंसते खेलते बच्चों की किलकारियाँ,बहते फव्वारे, ओर यहां की सबसे खूबसूरत बात जो इस जगह को खास बनाती है वो है तालाब के बीचों बीच इस पार्क का  बना होना । सब कुछ बहुत अच्छा था दिल लगाने के लिए ओर  प्यार करने वालों ये लिए आज मौसम भी बहुत सुहावना था मैं वहां कि खूबसूरती अभी निहार ही रही थी कि मेरे कानों में किसी की तेज आवाज पडी शायद कोई लडकी किसी को डाँट  रही थी उसकी आँखें गुस्से से भरी हुई थी वो एक लड़का लड़की पर भडक रही थी शायद वो एक दुसरे से प्यार करते थे वों उन्हे गुस्से मैं बोल रही थी ये क्या तुम्हारी उम्र है प्यार करने की , तुम्हे शर्म नही आती ये सब करते हुये । मुझे बहुत अजीब लगा कि प्यार का उम्र से क्या लेना देना और वो लोग इतने भी छोटे नही थे कि प्यार ना कर सके । बस बार बार एक ही बात कहे जा रही थी कि ये सब कुछ धोखा है दर्द से सिवाय कुछ नही मिलता इन सबसे ओर ये सब गलत है मैने उसे शांत कराया और उन लोगों को वहाँ से भेजा और वो लोग thanks बोल कर वहाँ से चले गये । फिर मैंने उस लड़की की तरफ देखा जो दिखने में तो बहुत मासूम ओर प्यारी थी उसकी आँखों में एक अजीब सा दर्द था जिसे मैं समझ नही पा रही थी उसकी गहरी आँखें जैसे कुछ कहना चाहती हों । उसके गुस्से को देखते हुये मैंने बहुत हिम्मत करके उससे पूछा आप उन लोगों पर इतना गुस्सा क्यों कर रही थी वो दोनो एक दूसरे से प्यार करते थे तो इसमें गलत क्या है उसने जो जवाब दिया उसे सुनकर मैं हैरान थी उसने कहा प्यार करना गलत नही है पर दोस्ती की आड में ये सब करना गलत है दोस्ती से ज्यादा का प्यार गलत है अपनी हवस को प्यार का नाम देना गलत है दुनिया को कहते फिरो कि हम दोस्त है पर उसकी आड में अपनी हवस पूरी करना गलत है उसकी बातें सुनकर मैं खामोश हो गई और जब वो जाने लगी तो मैंने उससे पूछा कि ये उनका आपसी मामला था आप को उनसे क्या लेना तो वो गुस्से से बोली मेरा लेना है क्योकि वो लड़का मेरा भाई था और ये हक मैं किसी को नही देती कि कोई किसी की भावनाओं से साथ खिलवाड करे । आज वो लडकी शायद इस झूठ को सच मान कर जी रही हो कि ये दोस्ती प्यार में बदल जायेगी पर ऐसा कुछ नही होगा चला जायेगा वो एक दिन छोडकर । आप ऐसा क्यों कह रही हैं और वो बस इतना कहकर चली गई ……..
     
                           
                                         कुछ कहानियां अधूरी रह जाती हैं…………………………………………..

    उस दिन के बाद से हम अक्सर मिलने लगे वो मुलाकातें कब दोस्ती मे बदल गई पता ही नी लगा । एक शाम मैं उसके साथ पार्क में घूम रही थी तो उसने मुझसे पूछा कि आज तुम बहुत खुश लग रही हो क्या बात है तो मैंने उससे कहा कि आज मेरा fiancé आ रहा है तो सुनकर वो भी खुश हो गई। ते मैंने कहा कि आज जब वो मुझे लेने आयेंगे तो तुमसे भी मिलवाउंगी इस बात पर वो मुसकुरा कर रह गई। थोडी देर बाद मेरे fiancé मुझे लेने आ गये मैंने उसे भी अपने fiancé को दिखाया पर जब मिलने को बोला तो उसने मना कर दिया और मेरे fiancé तो इस से भी ज्यादा शरमीले इँसान थे उन्होने पहले ही मना कर दिया था अरे इतनी बातें करली पर मैने आपका नाम तो पूछा भी नही अपना नाम तो बताओ क्या है तुम्हारा नाम ?
    याना……….मेरा नाम याना है
    तुम्हारा नाम तो बहुत अच्छा है यार बिल्कुल तुम्हारी तरह
    याना……thanks
    अच्छा ठीक है मैं चलती हूं फिर मिलूंगी तुमसे
    याना…..ठीक है बाय
    मैने जाते जाते उससे पूछा कि तुमने ऐसा क्यों बोला कि कुछ कहानियां अधूरी रह जाती हैं
    याना……….अभी तुम जाओ अगली बार बताउंगी
    और तभी उसे urgent call आया ओर वो चली गई ।
    मेरे fiancé ने आके पूछा कहाँ गई तुम्हारी दोस्त ? ओर मेरा गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर था
    हाँ हाँ तुम तो v.i.p हो जो तुम्हारे लिए सब काम छोड कर यहीं खडी रहेगी। अच्छा बाबा सॉरी
    ठीक है चलो अब घर चलते हैं
    और उस दिन के बाद से वो मुझे नही मिली मैं हर दिन उसका इंतजार करती पर वो नही आई!
    मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा था पता नही एक अजीब सा रिश्ता बन गया था दिन रात गुजरते गये पर वो नही आई।
    एक ठंड से भरी शाम मैं उदासी से घिरी पार्क पहुंची तो देखा वे शॉल में लिपटी बैंच पर बैठी थी उसे देखकर मैं बहुत खुश हो गई और जाकर उससे लिपट गई उसने गंभीर होकर कहा खवाहिश बैठो मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी मुझे कुछ समझ नही आया मैं उसके पास बैठ गई और उससे पूछा क्या हुआ इतनी चुप क्यों हो ?
    याना …… उस दिन तुमने पूछा था ना कि कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती है मैंने ऐसा क्यों कहा ?
    खवाहिश ….. हाँ पर वो तो उस दिन की बात है मंने तो बस ऐसे ही पूछ लिया था
    याना………आज मैं तुम्हे एक कहानी सुनाती हूँ
              5 साल पहले की बात है तब मैं college में थी नयी नयी सी जिंदगी शुरू हुई हो ऐसा लग रहा था आँखों में सपने लिए मैं भी जी रही थी पर मैंने नही सोचा था कि उसके आने से मेरी जिंदगी इक पल में बदल जायेगी। मुझे आज भी याद है 16अक्टूबर का वो दिन जब उसका facebook पर मेरे पास message आया था उसका
    16oct2010
    Harshil….हाय
    Yana…….हैलो
    Harshil…कैसी हो आप ?
    Yana……मैं ठीक हूं आप बताओ ?
    Harshil….मैं भी अच्छा हूं और बताओ क्या करती हो आप ??
    याना……..m doing graduation
    Harshil… कहाँ से ???
    Yana……. Ccs university
    Harshil……वहाँ तो मैं आता रहता हूँ मैं कभी आया तो क्या आप मिलोगी ??
    Yana……देखती हूँ पक्का नही कह सकती और वैसे आप आप करके बात करने की जरूरत नही है तुम करके भी बात कर सकते हो मुझे अच्छा लगेगा
    Harshil….ओर बता मोटी फिर खाना खा लिया क्या ???
    Yana……ये हुई ना बात और वैसे मैं मोटी नही हूं
    Harshil…..मुझे क्या पता मै कोई देखा थोडी है तेरे को
    Yana…हाँ ठीक है पर मैं मोटी नही हूँ
    Harshil…मैं तो मोटी ही बोलूंगा
    Yana….ठीक है मोटे
    Harshil….ओय मैं मोटा नही हूँ
    Yana….तो क्या मैं भी मोटू ही बोलूंगी
    Harshil….खाना खा लिया तूने ??
    Yana…..हाँ
    Harshil….भूखी सी अकेले अकेले खा गई
    Yana……नही तो अकेले कहाँ खाया घर वालों के साथ खाया😁😁
    Harshil…..भूखी सी ज्यादा दांत नी निकल रहे तेरे
    Yana……नही तो😂😂
    Harshil…..मोटी हो जायेगी खा खा कर
    Yana……नही होती तू अपना सोच
                   
    और इसी के साथ शुरू हो गई हमारी कभी ना खत्म होने वाली नोंक झोंक । हमारा सारा दिन एक दूसरे से बात करते हुये बीत जाता। हमारी सुबह gud morning के msg से शुरू होकर रात की gd nyt पर खत्म होने लगी।हम दोनों एक दूसरे की दुनिया बन गये थे जोबहुत खूबसूरत थी फिर वो दिन भी आया जब हमने पहली बार एक दूसरे को देखा।
    उसे देखते ही मैं उसकी हो गई थी ये बात मुझे भी तब महसूस नही हुई। मैं उसमे कुछ खोकर सी रह गई थीउसकी नशीली आँखे मेरा दिल चुराने के लिए काफी थी ऐसे ही समय बीतता गया और हम कब एक दूसरे की जरूरत बन गए पता ही नी चला और फिर जब उसने मेरे जन्मदिन पर surprise दिया और मुझे गले से लगाया तब महसूस हुआ कि हम दोस्ती से आगे बढ़ चुके थे पर मैने उससे इस बारे मे कुछ नही कहा ओर इकतरफा प्यार मे जीती रही। क्योंकि मैं जानती थी कि वो मुझे अपना नाम कभी नी देगा क्योंकि उसकी नजर में मैं कभी दोस्त से ज्यादा कुछ नही थी या ये कह लो कि वो इससे ज्यादा कुछ समझना ही नही चाहता था पर हम लोगों का रिशता दोस्ती से ज्यादा था मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती थी ओर ये बात वो भी अच्छे से जानता था फिर एक दिन वो भी आया जब हम दोनों के बीच की सारी दूरियां मिट गई हम दोनों एक दूसरे में इस कदर समा गये जैसे सागर में बारिश का पानी , मैंने अपने आपको उसे सौंप दिया क्योंकि मैं उसे प्यार करने लगी थी पर उसने किस हक से मांगा था मुझे मैं ये आजतक नही जानती थी पर एक बात समझ गई थी कि हमारा रिश्ता दोस्ती से ज्यादा का था उस दिन मैंने फैसला किया कि अपने दिल की बात उसे जरूर बताउंगी और इस रिश्ते को एक नाम दूंगी। पर आने वाले तूफान से मैं अनजान थी जिसने मेरी लाइफ को बदल कर रख दिया जिस दिन मैं अपने दिल की बात उसे बताने वाली थी उसी दिन मुझे पता चला कि वो abroad जा रहा है और ये सुनते ही मेरा दिल धक् से रह गया मेरी आँखों के सामने वो सारे लम्हे घुम गये जो मैने उसके साथ बिताये थे और वो जाते जाते अपनी आखिरी निशानी दे गया और मेरी आँखों में छोड़ गया कभी ना खत्म होने वाला इंतजार तभी आसमान में जाते हुये हवाई जहाज से उसका ध्यान टूटा और वो हकीकत मे वापिस आ गई और साथ ही उसकी आँखों से आंसू भी और मेरी भी और जाते जाते उसने मेरे हाथ में एक कार्ड ओर एक gift थमा दिया इससे पहले मैं उससे कुछ पूछ पाती वो चली गई। उसके जाने के बाद जब मैंने कार्ड देखा तो हैरान रह गई आज उसकी शादी थी उससे मिलने की खुशी और कहानी में इस तरह खो गइ कि मैने ध्यान ही नही दिया कि उसके हाथ मेहंदी से भरे हुये थे और शादी की जोड़ा पहन रखा था मैं बैठी रो रही थी तभी मेरा fiancé वहाँ आये ओर मुझे राता देख पूछने लगे कि क्या हुआ ओर ये तुमहारे हाथ में gift कैसा ? मैं रोते रोते उनके गले से लग गई और उन्हे सब कुछ सुना दिया सुनते ही वो बोले कि उसका नाम कहीं याना तो नही था मैंने बोला हाँ पर आपको कैसे पता? कहते ही कहते मेरा सिर चकरा गया ओर मैं वहीं बैंच पर बैठ गई। मैं इतनी बडी बेवकूफी कैसे कर सकती हूँ मेरे दिमाग मे ये बात पहले क्यों नी आई कि मेरे fiancé का नाम भी harshil है मेरे fiancé ने जल्दी जल्दी वो gift खोला जो उसने मुझे दिया था उसमें एक सिंदूर का box था और उसके साथ ही एक chit भी थी जिसपे उसने लिखा था कि harshil के नाम का सिंदूर तुम्हारे माथे पर ज्यादा अच्छा लगेगा और एक कार्ड था जिस पर लिखा था
               यूं तुम मुझसे बात करते थे या कोई प्यार का इरादा था
    ये सुनते ही harshil की आँखों से आंसू बहने लगे ये कहते हुये कि काश उस दिन ये कार्ड ले लिया होता तो आज हम साथ होते ये कहते हुये वो मुझे वहीं छोड़कर चला गया। मैं ऊपर आसमान मे उस अधूरे चाँद को देखने लगी उस चाँद को देखकर मन ही मन कहा सच कहा था उसने………….
                               
                                               कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती है

    समाप्त

  • दोस्ती

    चलो थोडा दिल हल्का करें
    कुछ गलतियां माफ़ कर आगे बढें
    बरसों लग गए यहाँ तक आने में
    इस रिश्ते को यूं ही न ज़ाया करें
    कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

    कड़ी धूप में रखा बर्तन ही मज़बूत बन पाता है
    उसके बिगड़ जाने का मिटटी को क्यों दोष दें
    कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

    यूं अगर दफ़न होना होता ,तो कब के हो गए होते
    सिल लिए थे कई ज़ख़्म हम दोनों ने ,
    तब जा के ये रिश्ते आगे बढें
    कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

    दोस्ती एक घर है जिसमे विचारों के बर्तन खड्केंगे ही
    विचारों में है जो दूरियां उनको क्यों आकार दें
    कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

    यूं भावनाओं के आवेश में चार बातें निकल जाती हैं
    उन बातों का मोल बढ़ा कर
    अपनी अनमोल दोस्ती का मोल कम न करें
    कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

    अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”

  • दोस्ती

    दोस्ती ऐसा, जैसे खुदा की परस्तिश।
    दोस्ती में है, बेइंतिहा प्यार की कशिश।
    दोस्तों की दोस्ती पे है कुर्बान ये जान,
    हमें अज़ीज़ हैं, अपने सभी मोनिस।

    देवेश साखरे ‘देव’

    परस्तिश- पूजा, मोनिस- दोस्त

  • दोस्ती

    Mam दोस्ती ही तो है एक ऐसा रिश्ता है जो जिंदगी के एक रंग में भी कई रंग दिखाता है ।
    वरना बिना दोस्तों के रंगीन जिंदगी भी बेरंग सी नजर आती है ॥
    Mam आपकी सच्ची दोस्ती से बढ़कर इस दुनिया में कुछ कहाँ है ।
    आप जैसा एक दोस्त सच्चा है आप जैसा तो अपना सारा जहाँ है ॥
    आप साथ हो मेरे तो डर किस उड़ती चिड़िया का नाम है ।
    मस्त- मस्ती में बस हर दम खिलखिलाने का मेरे काम है ॥
    जब हो कोई tension या किसी problem से हों परेशान ।
    तब आप के साथ होने से ही हो जाता है सारी समस्या का समाधान ॥
    आपकी नजरें ही कह देती हैं चल Anu इसे भी देख लेते हैं ।
    और हर भी पल में यूँ ही मुस्कुराने की हिम्मत दे देते हैं ॥
    जब होता है आपका साथ तो खुद में ही हिम्मत सी आ जाती है
    और चेहरा घोर उदासी में भी खिलखिला कर मुस्कुरा पड़ता है ॥
    आप ही तो हैं जो बिना कुछ बोले सब जान लेते हैं ।
    और हर expressions को दूर से ही भाँप लेते हैं ॥
    आप के साथ मिल कर हर बोझ हल्का हो जाता है ।
    आप से मिलकर पल में ही मन को सुकून मिल जाता है ॥
    दिन भर शरारत करना और रात भर उन पर खिलखिलाना ।
    और पुरानी बातों का ताजा करके यूँ ही पूरा दिन बिताना
    अब हो गए है आदत ॥
    Mam वो अजब गजब शरारते और कई कारनामों का बबाला ।
    वो शरारत की चटनी और शोर शराबे का मसाला ॥
    वो code words का खेल और लोगो को चिढाना ।
    और लोगो के नये नये नामों का बनाना ॥
    सब वो शरारते याद आएगी…………………
    वो Saturday की planing करना और अपने Group का active होना।
    वो पेड़ के नीचे खड़े होकर अपने Group में अपनी बातो पे खिलखिलाकर जोर जोर से हसँना…………
    Mam मेरी सच्ची दोस्त सिर्फ आप है, सच्चा दोस्त रखने वाला संसार में सबसे धनवान है ।।

  • दोस्ती

    दोस्ती

    ***
    दोस्ती हो
    तो ऐसी कि
    उसके मुक़ाबिल
    पुश्तैनी दुश्मनी भी
    फ़ीकी पड़ जाये….

    दोस्त
    के बिना
    रहा न जाये
    अगर दोस्त मिल जाए
    तो कुछ और न भाये….
    ****
    @deovrat 15.09.2019

  • दोस्ती

    दोस्ती ईमान है, मजहब है, खुदा है,
    ना ऐसा कोई रिश्ता, सबसे जुदा है।

    दोस्ती दवा है, दुआ है, जिंदगी है,
    डूबते जिंदगी की कश्ती का नाखुदा है।

    दोस्ती प्यार है, तकरार है, ऐतबार है,
    ना टूटने देंगे एतबार यह वादा है।

    दोस्ती परस्तिस है, कशिश है, अज़ीज़ है,
    यह बेहिसाब, न कम न ज्यादा है।

    दोस्तों की दोस्ती पे कुर्बान ये जहां है,
    अटूट हो दोस्ती ये ‘देव’ की दुआ है।

    देवेश साखरे ‘देव’

    परस्तिस- पूजा

  • दोस्ती

    यह दोस्ती अनमोल है बेजोड़ है यारों सुनो,
    तोहफा है भगवान का यारों सुनो,
    दोस्ती हसीन है महजबीं है यारों सुनो।
    बांधी हुई एक डोर है यारों सुनो।
    गमो को पीछे छोड़ दें है वो दवा यारों सुनो।
    दुख दर्द को जो दे भुला यारों सुनो
    रोशन जहां उन सब का है एक दोस्त भी जो सच्चा है ,
    यारों सुनो।

    निमिषा सिंघल

  • ये दोस्ती

    मेरी दोस्ती पर लिखी ये कविता, दोस्तों को समर्पित

    ये दोस्ती

    अल्हड़पन के लंगोटिये, ५० साल से साथ चल रहे हैं
    दोस्ती की किताब में रोज़, नये अध्याय लिख रहे हैं

    हमारी दोस्ती जगह, जाति, धर्म, वंश से अनजान है
    विद्वानों की फौज का जीवन में अहम् योगदान है
    सभी एक दूसरे की शान है, आधार जैसी पहचान है
    सब दोस्त जब तक साथ है, हर मुश्किल आसान है

    दो हज़ार का पता नहीं, कभी दो रूपए को लड़ते थे
    खाई में धकेल कर, बचाने भी खुद ही कूद पड़ते थे
    सबके सामने पर्दा, अकेले में बातों से नंगा करते थे
    दिन भर टांग खींचते थे, रात भर साथ २ पढ़ते थे

    वक़्त के साथ सबकी जिंदगी नये सिरे में ढल गयी
    समय सिमट गया, जिम्मेदारी और दूरीयाँ बढ़ गयी
    आधुनिक संचार सेवाओं ने इसमें कमाल कर दिया
    दूरीयों को ख़त्म करके, दोस्ती में धमाल कर दिया

    एक दूजे की स्वतंत्रता, निजता, जरूरतों का ध्यान
    ताक़त को उजागर और कमजोरी ढकना सीख गये
    समय और भाषा पे संयम, तू से तुम पर आ गये
    “योगी” दोस्ती वही है, दोस्ती के अंदाज़ बदल गये

    हे गोविन्द, तू भी एक सखा है, ये भूल मत जाना
    हम दोस्तों का साथ कल भी ऐसे ही बनाये रखना

  • दोस्ती

    छोटी सी ख़ता पे दोस्ती तोड़ दे,
    रिश्तों के समन्दर का जो मुँख मोड़ दे,
    उम्मीदों पर टिकी हुई दुनियाँ छोड़ दे,
    वो सम्बन्ध ही क्या जो बन्धन छोड़ दे।।
    RAAHI

  • दोस्ती मे कीमत को ढॅुढते देखा

    रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती !
    सितारो की जरूरत आसमान को होती!!!
    आप हमे भुल जा कोई गम नही ,
    मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती।
    मुझे तो मालुम था जब तक खुशबु रहे तब तक मक्खी भी ना साथ छोड़ेगी।
    सफर दोस्ती का कभी खत्म ना होगा।
    दोस्त मेरा प्यार कभी खत्म ना होगा।।
    लेकिन जहाँ मिले सोना(औकाद) वाला साथी तो छोड़ देना (लोहा) औकाद वाला दोस्त का साथी।
    क्योकि लोहा तो हर मोड़ पर मिल जाएगा,
    लेकिन सोना तो केवल मंजिल मे ही मिल पायेगा।।

    ज्योति

  • दोस्ती मे कीमत को ढॅुढते देखा

    रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती !
    सितारो की जरूरत आसमान को होती!!!
    आप हमे भुल जा कोई गम नही ,
    मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती।
    मुझे तो मालुम था जब तक खुशबु रहे तब तक मक्खी भी ना साथ छोड़ेगी।
    सफर दोस्ती का कभी खत्म ना होगा।
    दोस्त मेरा प्यार कभी खत्म ना होगा।।
    लेकिन जहाँ मिले सोना(औकाद) वाला साथी तो छोड़ देना (लोहा) औकाद वाला दोस्त का साथी।
    क्योकि लोहा तो हर मोड़ पर मिल जाएगा,
    लेकिन सोना तो केवल मंजिल मे ही मिल पायेगा।।

  • दोस्ती

    दोस्ती का अजब सा
    किस्सा है
    दोस्त जीवन का
    अहम
    हिस्सा है ।

    स्वार्थ का
    नामोनिशाँ तक
    है नहीं ,

    जन्म जन्मों का
    अमर रिश्ता
    है ।

    प्रिय मित्रों
    वसंती सवेरे की सरस.
    घड़ियों में
    सपरिवारसहर्ष ,मंगलकामनाएँ
    सहर्ष स्वीकार करें ।

    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश

  • दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए

    दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए।
    कद्र हमसे ना हुई,जो जुदा इस तरह हुए।
    हमने भी तो कुछ ,ज्यादा नहीं माँगा था आपसे।
    इतना सा त्याग कर सके ना आप हमारे वास्ते।
    महफिल म़े कद्र हुई ना हमारे ज्जबात की।
    आँखों में आँसू जम गये जब बिछुडने की बात की।
    दिल में हुआ अँधेरा ,ना कोई रोशन चिराग था,
    तुम अपनी रहा चल दिये, हम राह देखते रहे।
    जब हँस रहे थे चाँद तारे खुले आकाश म़े,
    तब रो रही थी आँखे हमारी तुम्हारी याद में।
    हम समझा रहे थे दिल को दे रहे थे तस्सली।
    आँखे निगैढी बार बार कर रही थी चुगली.
    हिया हूलक रहा था मेरा सोच कर ये बार बार,
    अब ना खुलेंगे कभी ,दिल के किसी के द्वार।
    आएँगी अब ना लौट कर अधरों पर हँसी कभी।
    ले गये समेट तुम जीवन की हर खुशी।
    दुश्मन को भी कभी ना रब ऐसी मुश्किल में डालना।
    खुशियों के मेले से उठा,गमें दरिया म़े ना डालना।

  • दोस्ती एक प्यार और भरोसे का रिश्ता

    सुख-दुख के अफसाने का,
    ये राज है सदा मुस्कुराने का,
    ये पल दो पल की रिश्तेदारी नहीं,
    ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का,
    जिन्दगी में आकर कभी ना वापस जाने का,
    ना जानें क्यों एक अजीब सी डोर में बन्ध जाने का,
    इसमें होती नहीं हैं शर्तें,
    ये तो नाम है खुद एक शर्त में बन्ध जाने का,

    ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का
    दोस्ती दर्द नहीं रोने रुलाने का,
    ये तो अरमान है एक खुशी के आशियाने का,
    इसे काँटा ना समझना कोई,
    ये तो फूल है जिन्दगी की राहों को महकाने का,
    ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का,
    दोस्ती नाम है दोस्तों में खुशियाँ बिखेर जाने का,

    आँखों के आँसूओं को नूर में बदल जाने का,
    ये तो अपनी ही तकदीर में लिखी होती है,
    धीरे-धीरे खुद अफसाना बन जाती है जमाने का,

    ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का,
    दोस्ती नाम है कुछ खोकर भी सब कुछ पाने का,
    खुद रोकर भी अपने दोस्त को हँसाने का,
    इसमें प्यार भी है और तकरार भी,

    दोस्ती तो नाम है उस तकरार में भी अपने यार को मनाने का,
    ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का

    – Udit Jindal

  • दोस्ती प्यार का मीठा दरिया है

    आओ, मुझमें नहाओ,
    डूबकी लगाओ
    प्यार का सौंधा पानी
    हाथों में भर कर ले जाओ।

    आओ,
    जी भर कर गोता लगाओ,
    मौज-मस्ती की शंख-सीपियाँ
    जेबों में भर कर ले जाओ।

    दोस्ती का दरिया
    गहरा है, फैला है
    इसमें नहीं तैरती
    धोखे की छोटी नौका
    कोशिश की तो
    बचने का नहीं मिलेगा मौका।

    – Puneet

  • दोस्ती

    आज फिर
    एक साथी मुझे छोड़कर चला गया
    आँखों को रुलाकर चला गया
    और होंठों को हँसा कर चला गया
    पूछ बैठा कि नाराज तो नहीं हो
    जाहिर भी कैसे करता दोस्त था अपना
    जाते -जाते “अपना ख्याल” रखना
    कहकर वो फिकर जताकर चला गया
    चेहरे को मुस्कुरा कर चला गया
    और हाथों को मिला कर चला गया
    जाने अनजाने में ही सही
    एक रिश्ता बनाकर चला गया
    खुद बिखरा हुआ था अन्दर से
    मुझे दुनिया हसीन बताकर चला गया
    ……………………………………………..
    अनूप हसनपुरी

  • अंधेरों ने निभायी दोस्ती हमसे

    अंधेरों ने निभायी दोस्ती हमसे
    उजालो से कही ज़्यादा हम्से

    …… यूई

  • उजालो से दोस्ती ना हुई

    अंधेरों सी हमें नफरत ना थी
    हाँ उजालो से दोस्ती ना हुई

    …… यूई

  • बचपन के दोस्त और दोस्ती

    भूलाएँ भी ना कभी है भूलती
    बचपन के दोस्त और दोस्ती
    ज़िन्दगी थी जिनमें ख़ुद हँसती

    ……. यूई

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