चलो लड़ना सीखे

कब तक जियोगे, समझौते भरी ज़िंदगी
तेरी आंखें बताती है, नहीं इसमें तेरी रजामंदी
अरे खुद से पूछ तो सही, तुझे क्या चाहिए ?
उम्मीद जमाने से ना कर, खुद बदल जाईये
आँखों में कोई ख्वाब है अगर, तो पूरा करना सीखे
अपने ख्वाब और हक के लिए, चलो लड़ना सीखे

मुश्किलें तो आती है नदियों के राह में भी
पर मुश्किलों की परवाह उसे रहती नहीं कभी
बना लेती है अपना रास्ता वो हर कही
मंजिल का ख्याल कर हमेशा आगे ही बढ़ी
अरे तेज ना सही तो धीरे धीरे आगे बढ़ना सीखे
मुश्किलों में नदियों सा, चलो लड़ना सीखे

आंधियाँ उड़ा ले जाती है सूखे पत्ते और धुल
डटकर मुकाबला तो चट्टानें ही करती है ये मत भूल
अपने अंदर का डर निकाल हौसला चट्टान सा कर
खुद की शक्ति पहचान ज़िंदगी जायेगी निखर
आंधियों से लड़ना है तो खुद पर यकीन करना सीखे
चट्टान सी बेजान चीजों से चलो लड़ना सीखे |

– simmi

Comments

2 responses to “चलो लड़ना सीखे”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

Leave a Reply

New Report

Close