हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे

  1. हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे,

    कोई जख़्म फिर से नया तो न दोगे।
     
    हसीं वादियों के सपने दिखाकर,
    कहीं यार तुम भी दग़ा तो न दोगे।
     
    हिफ़ाजत का कर के बहाना कहीं तुम,
    दिया जिन्दगी का बुझा तो न दोगे।
     
    निहां राज़ ए दिल गर बता दूँ तुम्हें तो,
    नजर से तुम अपनी गिरा तो न दोगे।
     
    अगर याद आयी किसी दूसरे की,
    मुहब्बत मेरी तुम भुला तो न दोगे।
     
    भरोसे पे तेरे किए जो भरोसा,
    उसे ख़ाक़ में तुम मिला तो न दोगे।
     
    बड़ी मुश्किलों से सम्हाला है मैंने,
    मुहब्बत की कश्ती डुबा तो न दोगे।
     
    मुझे ख़ौफ़ यूँ बिजलियों का बताकर,
    खुद अरमान दिल के जला तो न दोगे।
     
    ‘मिलन’ छोड़ जाओ मेरे हाल मुझको,
    मुकद्दर का लिक्खा मिटा तो न दोगे।
                               ———मिलन..

Comments

7 responses to “हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे”

  1. Shivesh Agrawal Nanhakavi Avatar
    Shivesh Agrawal Nanhakavi

    Bahut khoob gajal

    1. Milan Chaurasia "Milan" Avatar
      Milan Chaurasia “Milan”

      Bahut shukriya Agrawal saheb

    1. Milan Chaurasia "Milan" Avatar
      Milan Chaurasia “Milan”

      Bahut shukriya

    1. Milan Chaurasia "Milan" Avatar
      Milan Chaurasia “Milan”

      Shukriya sethi saheb

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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