कहाँ था क्या था और क्या हो गया हूँ मैं।
इस भीड़ में न जाने कहा खो गया हूँ मैं।।
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अब मुझको आवाज़ क्यूँ देती है जिंदगी।
जब मौत के आगोश में ही सो गया हूँ मैं।।
@@@@RK@@@@
कहाँ था क्या था और क्या हो गया हूँ मैं
Comments
3 responses to “कहाँ था क्या था और क्या हो गया हूँ मैं”
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Nice
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Thanks
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वाह
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