यूँ होता तो क्या होता ?

अगर पेडों को चलना आता,

तो क्या होता?

अगर पेडों को बोलना आता,

तो क्या होता?

क्या वे यूँ ही कटते जाते?

क्या उनके बदन यूँ ही छिलते जाते?

और क्या वे अपना विनाश होने देते?

 

अगर पशुओं को बोलना आता,

तो क्या होता?

क्या वे बेवज़ह अपना शिकार होंने देते?

क्या वे अपना शोषण होने देते?

क्या वे ज़ंजीर में बंधे रहने को मजबूर होते?

अगर ऐसा होता तो हम इंसान क्या करते?

किसपर अपना ज़ोर आजमाते? किसे जब मन चाहा उसका शोषण करते?

हम इंसान सिर्फ कमज़ोर पर वार करते हैं।

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