वो कहने लगे रुख से पर्दा हम हटा नहीं सकते
हम ने कहा तुम्हारे हुस्न को देखे बिना हम जा नहीं सकते
वो कहने लगे इस से हमारी रुसवाई होगी
हमने कहा होने दो गर जो जगहसाई होगी
उस ने कहा कभी तो हमारा कहा भी मान लिया करो
हमने कहा हरदम परदे में रह कर न जान लिया करो
वो कहने लगे बड़े ही लाचार नज़र आते हो
हमने कहा कभी बेपर्दा आप आते हो
मुस्कुरा कर वो बोले अबके जरूर आउंगी
हमने कहा वादा करो के अबके निभाऊंगी
इतना कहना था के वो मुस्कुराने लगे
धीरे धीरे नज़रें अपनी वो उठाने लगे
फिर धीरे से कहा ये वादा है हमारा
हमने कहा अब बस इंतज़ार है तुम्हारा
इतना कह कर वो महफ़िल से जाने लगे
कसम इश्क़ की वो और भी याद आने लगे
उनके दिल को जाना शायद मंज़ूर न था
मगर वक़्त को शायद ये मंज़ूर न था
अब तो इंतज़ार है हमको उनके आने का
और उनके बेपर्दा हुस्न पर गौर फरमाने का………………….!!
D K
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