“ख्याल था”

इसलिए भी हमने बदनाम नहीं किया
उसको और उसकी ज़ात को साहिब

कुछ तो अपनी मोहोब्बत का ख्याल था
कुछ उसकी झूठी इज़्ज़त का ख्याल था

देव कुमार

Comments

One response to ““ख्याल था””

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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