मुक्तक

तेरे लिए हरपल बेकरार सा रहता हूँ!
तेरे लिए हरपल तलबगार सा रहता हूँ!
गुफ्तगूँ की चाहत भी जिन्दा है लेकिन,
तेरी बेरुखी से लाचार सा रहता हूँ!

#महादेव_की_कविताऐं'(24)

Comments

5 responses to “मुक्तक”

  1. सीमा राठी Avatar

    bahut behatreen tarike se farmaya

  2. Abhishek kumar

    Good

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