आओ बैठो संग मेरे एक एक कप चाय हो जाए,
फिर से बीते लम्हों की चर्चा खुले आम हो जाए,
कह दूँ मैं भी अपने दिल की, कहदो तुम भी अपने दिल की,
और फिर तेरे मेरे दिल का रिश्ता सरेआम हो जाए,
वैसे तो हर रात होती रहती है ख़्वाबों में मुलाक़ात तुझसे,
चल आज चाय की चुस्की के बहाने नज़ारा कुछ ख़ास हो जाए॥
राही (अंजाना)
चाय का बहाना
Comments
One response to “चाय का बहाना”
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Great
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