आओ तन मन रंग लें

चली बसंती हवाएँ ,

अल्हड़ फागुन संग,

गुनगुनी धूप होने लगी अब गर्म,

टेसू ,पलाश फूले,

आम्र मंज्जरीयों से बाग हुए सजीले,

तितली भौंरे कर रहे ,

फूलो के अब फेरे ,

चहुंँ दिशाओं में फैल रही,

फागुन की तरूणाई,

आओ तन मन रंग लें,

हम मानवता के रंग ,

भेद-भाव सब भूल कर,

आओ खेलें रंगों का ये खेल ,

प्रेम , सौहार्द के भावों से,

हो जाए एक-दूजे का मेल,

होली पर्व नहीं बस रंगो का खेल,

प्रेम , सौहार्द के भावों का है ये मेल ।।

 

 

 

Comments

7 responses to “आओ तन मन रंग लें”

    1. Ritu Soni Avatar
      Ritu Soni

      Thanks a lot Sridhar ji

    1. Ritu Soni Avatar
      Ritu Soni

      Thanks a lot Shakun ji

  1. Abhay Avatar

    बहूत ही बढिया,रितू जी

    1. Ritu Soni Avatar
      Ritu Soni

      Thanks a lot ABHAY. Ji

  2. Abhishek kumar

    Nice

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