रात अँधेरा ख़ामोशी तन्हाई,अश्क़ मिला।
यादें वक़्त पल तस्वीरें बातें,अश्क़ मिला।
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जिंदगी झूठ क्या वादें क्या क़समे इरादें।
मौत सच तन्हाई सच आँखें,अश्क़ मिला।
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मिलना वादियां झरने ये पहाड़ ओ मौसम
वीरानी निशानी नादानी क्या अश्क़ मिला।।
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जमी आसमाँ चाँद देखें हजारो तारे सितारें।
टूटे हुए ख़्वाब अधूरी सी बात,अश्क़ मिला।।
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मासूम सी शक्ले फ़रेबी इरादें तज़ुर्बा हुआ है।
ख़ुद को किया है जो तेरे हवाले,अश्क़ मिला।।
@@@@RK@@@@
रात अँधेरा ख़ामोशी तन्हाई,अश्क़ मिला
Comments
2 responses to “रात अँधेरा ख़ामोशी तन्हाई,अश्क़ मिला”
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वाह बहुत सुंदर
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Nice one
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