क्यों दर दर भटकता है तू

क्यों दर दर भटकता है तू
अपनी मांगों के लिए

क्यों रोज अड्डे बदलता है तू
अपनी चाहतों के लिए

क्यों तू उस इंसान के पास जाता है
जो खुद अल्लाह के भिखारी है

अरे ये तो बस एक व्यापार है
असल में इनका हाथ भी खाली है

Comments

4 responses to “क्यों दर दर भटकता है तू”

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    KYA KHOOB KAHI

    1. Sukhbir Singh Avatar
      Sukhbir Singh

      Thanks

  2. Abhishek kumar

    Sundar

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