क्या बतायें क्या हो गया है हमें
तुम ही बताओ कि क्या बतायें हम
क्या बतायें
Comments
5 responses to “क्या बतायें”
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कोई कश्मकश है ये दिल की ,
या फिर घेरे है तुम्हे कोई गम
तुम अल्फ़ाज़ों का एक मोती तो लाओ
फिर पूरी माला पिरो ही लेंगे हम-

very nice
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Good
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वाह बहुत सुंदर
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सुन्दर रचना
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