वो मेरी काली जुल्फ़ों को घटाओं सा सुंदर कहते थे आंखो को मेरी वो ठहरा हुआ समंदर कहते थे आज वो करीब नहीं तो सोचती हूं अक्सर कैसी होती मैं, अगर वो होते साथ मेरे?

हवाओं में पतंग की तरह उड़ने को जी करता है बैठकर लहरों की बाहों में तैरने को जी करता है जी करता है पा लूं ऊंचाई आसमा की पाताल की गहराई नापने को जी करता […]

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है ये कागज की […]

चुनावों के इस मौसम में फिजा में कई रंग बिखरेंगे अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे

मां तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो सुख-दुख, खुशी-गम हर परिस्थिति में थामें हाथ बिन कुछ कहें ही समझती, मेरे दिल की हर बात मां तुम मेरे लिए ईश सम्‍य हो ।। धैर्य, संतोष व […]

कोई काली कमा के रईस हो जाता है कोई सबकुछ लुटा के रईस हो जाता है दुनिया का दस्तूर निराला है यहां तो दिल का लुटेरा भी रईस हो जाता है|

क्या छुपा के घूमते है लोग, पता नहीं, किसी के ख्वाब, या ख्वाहिशें खबर नहीं, कुछ लम्हे दबा रखे है अपनी हथेली में या फिर जिंदगी को कर लिया है कैद

जो हो गयी है बंजर जमीन, जमाने कि दिल की तू कुछ अश्क बहाकर इसे नम कर दे|| हो गया हो अगर सूना तेरे मन का आंगन इक पक्षी को रखकर इसमें कलरव भर दे|| […]

कभी कभी ये ख्याल आता है कि कभी उनका ख्याल ना आये तो दिल को राहत मिले| मिलते रहते है हमें अपना कहने वाले कई हमें जो वाकई अपना समझे कभी कोई ऐसा मिले|

सितम पे सितम तुम ढाते रहे अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी कर सको गर महसूस तो जानो किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे… […]