शपथ तुझे इस योवन की

क्यूं बह रहे अश्रु चक्षु से , तान भृकुटि जन जन की
फैला भ्रष्ट मेघों का साया , नहीं आवश्यकता व्यर्थ रुदन की
सियासी भेड़िये बने नरभक्षी , जब लाज गिरा दी सिंघासन की
हो रही खंड खंड रूह भारती की ,आवाज उठी शोणित के आंदोलन की
आव्हान करे तुझे पथ प्रलयंकर , जरुरत रणचंडी के पूजन की
अरे हनी सिंह छोड़ अब भगत सिंह गा ,शपथ तुझे इस योवन की …..

पुकारती तुझे पुनः, जो लोलुप हुई संस्कृति
क्या सुनी नहीं पदचापें सरहद पर
क्यूं बसा ली रग रग में रति
क्यूं नाम जुबां पे सनी लियोनी
जिस देश का गौरव महासती
इतिहास उठा , इतिहास गढ़
तुझमे भी है विवेकानंद मति
आभा हार रही तमस से ,
जरुरत पढ़ने की अब कृष्ण कृति
तितिक्षा रख सावरकर जैसी , स्वीकार चुनौती स्वाभिमान की
मस्तक चीर कर रख पापी का , जब बात हो नारी सम्मान की
शपथ तुझे इस योवन की …………………

भूल जा मुरली मनोहर को ,चक्रपाणि स्मरण रहे
जो सौ योजन लांघ गया ,उस महावीर जैसा प्रण रहे
काल के कपाल में कर हलचल
त्रयम्बकेश्वर का उर में तांडव रहे
आहुति मांग रहा अग्निकुंड
इंकलाब की ज्वाला प्रचंड रहे
उठा आयुध , धर गांडीव
साँसों में कुरुक्षेत्र का कण कण रहे
बहुत गा लिया कजरी महावर , अब गाथा गया बलिदान की
विश्व का कोना कोना डोल उठे , गूँज ऐसी उठे राष्ट्रगान की
शपथ तुझे इस योवन की …………………

बसंत विध्वंस हुआ , प्रसून शूल बने
विषधर ने विष उगला , मकरंद विसर बने
प्रष्फुटित हो नया सवेरा , पर बुझी हुई बाती बने
अकेले ही गुनगुनाते रहे , मधुरिम गान न बने
ओढ़ तो लिए सफ़ेद परिधान जिन्होंने ,
पर पटेल जैसे लोह ना बने
आंसू तज शोले बरसा , अब न बजे ढपली बेईमान की
ले तेरे हाथों सौंपी विरासत , हिन्दुस्थान के अभिमान की
शपथ तुझे इस योवन की …………………

Comments

5 responses to “शपथ तुझे इस योवन की”

    1. Pankaj Garg Avatar
      Pankaj Garg

      शुक्रिया

  1. Shakun Avatar

    Waah plz meri poems par bhi like kijiye

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Abhishek kumar

    Nice

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