शायरी

खुद से दूर क्यूँ तुम हो , बड़े मगरूर क्यूँ तुम हो

जो तेरा है नहीं उसके ,  नशे में चूर क्यूँ तुम हो

तेरी मायूसी दिखती है , घनी रातों के साये में

यूँ ही तकिये भिगोने पे , बड़े मजबूर क्यूँ तुम हो ।

@पंकज गर्ग


 

 

Comments

3 responses to “शायरी”

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    NICE ONE

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Abhishek kumar

    Nice one

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