तुझ बिन बात नहीं होती

भरी हो हुस्न से महफ़िल , तुझ बिन बात नहीं होती

गरजते हो घने बादल , मगर बरसात नहीं होती

रचायी ना हो मेहँदी तो , दुल्हन खास नहीं होती

सितारे व्यर्थ ही चमके यूँ ही जगमग मगर सुन ले,

जब तक चाँद ना निकले , कहीं पर रात नहीं होती ।।

Comments

2 responses to “तुझ बिन बात नहीं होती”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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