मुक्तक

गुमशुम,मदहोश,खामोश कहाँ रहते हो

वो क्या कहते है,हाँ मोहब्बत में रहते हो

वो सुर्ख होंठ,क़ातिल नज़र बला की अदा

एक दीद में क़त्ल का सामान रखते हो

“विपुल कुमार मिश्र”

#VIP~

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Wow

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