ग़ालिब के जन्मदिन पर सभी शायरों, कवियों को हार्दिक शुभकामनाये…
ग़ालिब ये किस जहान में तू हमे छोड़ गया है
ना सच्चाई है ना अफसाने ना यार रहे ना दीवाने
@प्रदीप सुमनाक्षर
ग़ालिब
Comments
4 responses to “ग़ालिब”
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कहीं भी इक फ़ूल भी नही, वीरान है जहां सारा
इस जहान में है तो बस, गालिब तेरे शेर का सहारा-
बहुत खूब, भी दो जगह लग गया है।
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बढ़िया।।
क्रप्या नव वर्ष आने को है कविता को वोट करें। -
Nice
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