सुनो अमृता!

सुनो अमृता!

सुनो अमृता!
अच्छा हुआ
जो तुम लेखिका थी
क्योंकि अगर तुम लेखिका न होती
तो निश्चित तौर
तुम्हें चरित्रहीन और
बदलचलन की श्रेणी में रखा जाता।

अच्छा हुआ तुम असाधारण थी
क्योंकि साधारण स्त्रियों की ज़िंदगी में
तीन-तीन पुरुषों का होना
वैश्यावृत्ति माना जाता है

अच्छा हुआ अमृता
तुम बोल्ड थी
इसीलिए तुम्हारे मुंह पर
किसी ने कुछ न कहा
किन्तु यह भी सत्य है
आज इमरोज की कामना करने वाली
कोई भी स्त्री अमृता बनना नहीं चाहेगी
क्योंकि दहलीज़ों को लांघना
कोई मज़ाक नहीं है।

Comments

5 responses to “सुनो अमृता!”

  1. ashmita Avatar
    ashmita

    Nice poem

    1. Lalit Kumar Mishra Avatar
      Lalit Kumar Mishra

      शुक्रिया अश्मिता

  2. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    well said!

    1. Lalit Kumar Mishra Avatar
      Lalit Kumar Mishra

      शुक्रिया अनिरुद्ध

  3. Abhishek kumar

    Umda

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