मुक्तक

तेरी याद जब कभी कहानी आती है!
तेरे जख्म की नजर निशानी आती है!
किस्तों में रात चुभती है तन्हाई की,
करवटों में दर्द की रवानी आती है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Superb

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