दोहा

जिसके ख़ातिर छोड़ हम,आए थे घर-बार।
वो ही अब कहने लगा,रहा नहीं है प्यार।।

ठा. कौशल सिंह✍️

Comments

3 responses to “दोहा”

  1. राम नरेशपुरवाला

    खूब

  2. Abhishek kumar

    Good

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