मुक्तक

जब कोई जिन्दगी मजबूर हो जाती है!
राह मुश्किलों की मग़रूर हो जाती है!
मंजिल निगाहों में करीब होती है मगर,
तकदीर उम्मीदों से दूर हो जाती है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

6 responses to “मुक्तक”

  1. Ashok Avatar

    बहुत बढ़िया मिथिलेश जी

    1. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया

  2. Anjali Gupta Avatar

    Hamesha ki tarah bahut hi khoobsurat

  3. Panna Avatar

    Nice one..
    जितना जिंदगी को पास बुलाओ
    जिंदगी उतना दूर हो जाती है
    मंजिलो पर नजर रखते रखते
    पैरों से राह गुम हो जाती है

  4. Abhishek kumar

    Good

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