जिंदगी भी कितनी अजीब है

जिंदगी भी कितनी अजीब है
एक लंबे संघर्ष के बाद ही
खूबसूरत सी जीत है,

आँधी की तबाही के पहले
हर बार सन्नाटा सा होता
रौशनी तभी जीत पाती है
सामने उसके जब अँधियारा होता,

जिंदगी कितनी अजीब है
दुःखी होते मन को
हर बात पे कुछ न कुछ कम सा नज़र आता
और जीत के जश्न में वही मन सब कुछ भूल सा जाता

सूरज की क़द्र तभी खूब होती
जब सर्द हवा का कहर हर जगह बरपा सा होता,
अन्न की कीमत इंसान तभी समझ पाता
जब अपना सा कोई सड़क किनारे भूँखा नज़र में आता,

धन दौलत की ताक़त में इंसान मौत को ही भूल जाता
एहसास तभी होता जब ज़िगर का टुकड़ा कोई हमेशा के लिए दूर चला जाता,

जिंदगी कितनी अजीब है,
हर विपरीत परिस्थति में ही जीवन के सच की जीत है।।

-मनीष

Comments

2 responses to “जिंदगी भी कितनी अजीब है”

  1. Panna Avatar

    सूरज की क़द्र तभी खूब होती
    जब सर्द हवा का कहर हर जगह बरपा सा होता,… बहुत ही बेहतरीन पंक्ति

  2. Abhishek kumar

    Superb

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