लफ़्ज हो गये है खत्म दास्ता बयां करते करते
कुछ कहते हम अक्सर थम जाते है
लफ़्ज
Comments
5 responses to “लफ़्ज”
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मोहब्बत की सर्दी शुरू हो गयी है
अश्क अब आंखों में ही जम जाते है|-

beautiful lines
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नूर जिंदगी से जैसे रूखसत हो गया है
अंधेरों मैं ही हम अब रम जाते है -

Waah
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Good
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