मुझे यकीन है

मुझे यकीन है की
इक रोज़ तेरा भी सवेरा होगा,
अंधेरो का कोई साया ना होगा!
इक रोज़ तेरा भी सब कुछ होगा,
कुछ ना होने को कुछ ना होगा!
इक रोज़ चाहा है जैसा वैसा ही होगा,
अनचाहा कुछ भी ना होगा!
मुझे यकीन है की
इक रोज़ तुम्हे मेरे यकीन पर यकीन होगा!

खूबसूरत सूरज का डूबना भी होता है
क्योंकी सबको, उसके फिर से
उगने पर यकीन होता है!

Comments

5 responses to “मुझे यकीन है”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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