एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई

एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई,

भला कैसे ये जिंदगी शर्मोसार हो गई,

यूँ तड़पी बेहद फिर तार-तार हो गई,

बेरुखी दुनियाँ भी तो बार-बार हो गई,

क्यों छिपती-छिपाती मेरी लाज एक दिन,

हर किसी की नज़रों के आर पार हो गई।।

राही (अंजाना)

Comments

8 responses to “एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई”

  1. Mithilesh Rai Avatar

    बहुत सुन्दर

  2. देव कुमार Avatar
    देव कुमार

    Welcome

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