बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन,
अंग्रेजी जो भी पढ़े होवे हिय से हीन,
संस्कारों की खेती अब न कर पाये कोई दीन,
हिन्दी को अपनी कोई ले न हमसे छीन।।
राही (अंजाना)
बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन
Comments
9 responses to “बिन निज भाषा के ज्ञान के बजे ना कोई बीन”
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Nice
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Thank you
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Very good
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Thank you
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Nice
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