मुक्तक

फसाना जिंदगी का अजीब जैसा है!
हर ख्वाब आदमी का रकीब जैसा है!
बदली हुई निगाहों का खौफ है दिल में,
मंजिलों का मिलना तरकीब जैसा है!

मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

Comments

5 responses to “मुक्तक”

    1. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया

    2. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया

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