गीत होठो पे समाने आ गये है
प्रीत भावो के सजाने आ गये है
?
चाह ले के आस छाके गा रही है
साज ओढे ताल लुभाने आ गये है
?
रीत गाने के सदाये दे रहे है
भाव ले के तान भाने आ गये है
?
चाव गाने का हमारा है नही पर
भाव ले के चाव छाने आ गये है
?
आज मेरा दौर फीका भी नही है
बात मीठी सी सुझाने आ गये है
?श्याम दास महंत ?
गीत होठो पे समाने आ गये है
Comments
4 responses to “गीत होठो पे समाने आ गये है”
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Nice sir
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Waah
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वाह
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सुन्दर
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