गीत होठो पे समाने आ गये है
प्रीत भावो के सजाने आ गये है
?
चाह ले के आस छाके गा रही है
साज ओढे ताल लुभाने आ गये है
?
रीत गाने के सदाये दे रहे है
भाव ले के तान भाने आ गये है
?
चाव गाने का हमारा है नही पर
भाव ले के चाव छाने आ गये है
?
आज मेरा दौर फीका भी नही है
बात मीठी सी सुझाने आ गये है
?श्याम दास महंत ?
Author: Shyam Das
-
गीत होठो पे समाने आ गये है
-
जवानी हाय इठलाने लगी है
जवानी हाय इठलाने लगी है
जुबां पे आह सी आने लगी हैहमारी चाह भडका के अदाये
तुफानी प्रीत भडकाने लगी हैउठी है प्रीति अंग-अंग मे नशीली
खिला के राग चहकाने लगी हैहया ऊठा के रग-रग मे सदायें
नवेली रीति दे जाने लगी हैनई आहे दिखा के जोश लावे
तुफां ताने जुबां पे गाने लगी हैं
✍ श्याम दास महंत✍(दिनांक 19-06-2028)
-
न करो चमन की बरबाद गलियां
✍?अंदाज ?✍
——-$——–
✍
न करो चमन की बरबाद गलियां
कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँपुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना
बागो मे खिलाना मोहक तितलियांआगाज करो नव राह बदलाव के
गुलशनो मे रहे सुकून की डलियांमाली हो तुम करो महसूस यहां
समझो सृजन की सत्य पहेलियांमासूम वृक्ष लताएं हैं सव॔ धरोहर
फैलने दो इनकी मंत्रमुग्ध लडियांसंस्कार धरो प्रकृति का मान रखो
धरती पे निखारों मानवीय कडियां
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक -24-04-2018) -
नूर हो तुम आफताब हो तुम
✍?(अंदाज) ?✍
——-$——
✍
नूर हो तुम आफताब हो तुम
लहर हो तुम लाजवाब हो तुममेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ
दिलकश गजब शबाब हो तुमजिसे समझा मैने दिल से अपना
मुक्कमबल सच्चा ख्वाब हो तुमदेख कर चढता है नशा मुझमे
दिलकश नशीली शराब हो तुमहर दिन पल तुझको पढता हूं मै
सुकून भरी मेरी किताब हो तुम
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍
(दिनांक -25-04-2018) -
उठ जाग मत थक हार इंसान तू
✍?(अंदाज )?✍
———-$———-
✍
उठ जाग मत थक हार इंसान तू
मानवीय औकात निखार इंसान तूहै तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान
आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तूमानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ
स्व पहचान कर रख धार इंसान तूतेरा कम॔ चरित्र गुण की हो पूजा
अपना शौर्य सूर उबार इंसान तूविकृत परिवेश प्रथा हालात हटा
बुध्दि शक्ति से कर वार इंसान तू
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍
(दिनांक -26-04-2018) -
घोर कलियुग है देख पाप प्रबल
✍?(अंदाज )?✍
———$——-
✍
घोर कलियुग है देख पाप प्रबल
चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदलदूषित जल घना हवाएं प्रदूषित
मन मे मैल देख बेईमानी सबलस्वभाव मे मिठास बोली मे छल
दिखावा ठोस देख बुध्दि मे नकलकपट भाव है अंतस मे रचा-बसा
आचरण मे नाटक का देख अकलआपसी मेल मिलाप मे छुपा स्वाथं
मानव मे चाल देख कुटिल सफल
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍
(दिनांक -26-04-2018) -
विषाक्त है आज परिवेश देख।
✍?(गीताज) ?✍
———$——
✍
विषाक्त है आज परिवेश देख।
आक्रोश मे सुप्त आवेश देख।।
कण कण मे है गुस्सा
आलम मे नव क्रोध है
धरती कुम्हला रही
क्षण मे चढा अवरोध है
पल बना है द्रोही खाके ठेस देख।
विषाक्त है आज परिवेश देख ।।
नजारो मे अहम तीव्र
बचनो मे झूठ फरेब
चापलूसी चलन मे तेज
रौब मे अकड ऐठ ऐब
दिखावा काढ़े बैठा है भेष देख ।
विषाक्त है आज परिवेश देख ।।
मानवता है पीड़ित
इंसानियत है दुखी
मानव है आज वेबश
वासना है भयावह भूखी
रौद्र मे रोष की भावना शेष देख ।
विषाक्त है आज परिवेश देख ।।
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक -13-04-2018) -
विष मय है आज देख परिवेश।
✍?(गीताज ) ?✍
——-$——-
✍
विष मय है आज देख परिवेश।
आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।।
कण कण मे गुस्सा
आलम मे नव क्रोध
धरती है कुम्हलाई
पल बना है अबोध
क्षण बना है विद्रोही खाके ठेस ।
आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।।
नजारो मे अहम
बचनो मे फरेब
चापलूसी मे बैठा
ठाठ अकड ऐठ ऐब
घृणित मंजर काढ़े बैठा है भेष ।
आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।।
मानवता है पीड़ित
इंसानियत है बुझी
मानव देख है वेबश
रीति है अनसुलझी
भाव देख रहादृश्य देख निनिंमेश।
आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।।
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक -13-04-2018) -
न हताश रख न उदास रख
✍? ( अंदाज ) ?✍
—–$—‘
✍
न हताश रख न उदास रख
जिंदगी मे बस तू आस रखप्रतिकूलता से न तू डर कभी
हौसला जीवन मे खास रखअसफता पल है निखार का
निज पे हिम्मत विश्वास रखसंघर्ष के बिना जीवन है अधूरा
हर दिन एक अभिनव प्रयास रखजिंदगी का नाम है ईक अध्याय
अपने अंदर बस तू इतिहास रख
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक -11-04-2018) -
जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए
✍?(अंदाज)?✍
—–$—–
✍
जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए
जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिएरूठना मनाना क्रम है जीवन का
रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिएसच्चे प्रेम की परिभाषा यही है
नेह का श्रद्धा आपार जिंदा रखिएबुराईया कटुता है मन का कचरा
मंशा मे शुद्धता सार जिंदा रखिएसबको मिले संसार की हर खुशी
ऐसा सात्विक विचार जिंदा रखिएखुद से मिले इंसान को प्रसन्नता
धारणा ऐसी बेशुमार जिंदा रखिए
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
( दिनांक-09-04-2018) -
विकराल बन तू महाकाल बन
✍?(अंदाज) ?✍
——-$——
✍
विकराल बन तू महाकाल बन
मिसाल बन तू बेमिसाल बनअनंत अकूत अद्भुत साहस धर
प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बनबुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां
संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बनसभ्यता संस्कार रहे सुरक्षित सदा
सौहार्द्र समन्वयक शुद्ब बहाल बनमानव की मानवता सम्मान बचा
स्वयं उत्तर बन तू नही सवाल बन
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक -06-04-2018 -
दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए
✍?(अंदाज) ?
—–($)—-
✍
दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए
गम मे भी खिलखिलाना सीखिएउलझने आये चाहे जितने भी
रंज मे भी मचल जाना सीखिएसंताप है सब प्रारब्ध कर्मो का
यह समझ सब्र लाना सीखिएलक्ष्य चुन मंजिल को पा जाओ
सफलता तक खुद जाना सीखिएजीवन का गहरा अथ॔ समझकर
जिंदगी सफल निभाना सीखिएआदश॔ बने यह जीवन अर्जुन
प्रेरणा जग को दे जाना सीखिए
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक -05-04-2018) -
हौसला बुलंद रखो धीर मन मे
✍?(अंदाज ) ?✍
—–($)—-
✍
हौसला बुलंद रखो धीर मन मे
आयेगी बहार जरूर चमन मेनैराश्य को सदा ध्वस्त करो
मेहनत संवारो हमेशा तन मेसर्वोच्चता सिध्द सव॔ श्रेष्ठ करो
उत्साह रखो पल-पल यौवन मेसत्य धर्म न्याय उपासना बने
सेवा परोपकार रहे जीवन मेकम॔ शुद्ध रख सहज लक्ष्य साधो
मिलेगी सफलता ध्येय नव रण मे
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
( दिनांक – 05-04-2018) -
विद्रूपता का सव॔ विनाश करो
✍? (अंदाज ) ?✍
——-($)——
✍
विद्रूपता का सव॔ विनाश करो
कण -कण मे दृढ विश्वास भरोशौर्यशिलता का प्रतीक तुम
बुद्धि मे विवेक गुण खास धरोचिंतन करो स्वास्थ्य मंथन करो
सुखद सम्भाव रहे प्रयास करोघृणित बुराईयो का न वास रहे
मानवीय समझ मे हर उजास भरोकम॔शीलता की गढ परिभाषा नई
शुद्ध मानवीय औकात पास रखोटूटे गिरे को देकर जीवन पथ नया
पथभ्रष्टो मे सच्चाई सुवास भरो
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ(छग)
✍??????✍
(दिनांक 03-04-2018) -
नव पल परिवेश का अहवान हो
✍? (अंदाज )?✍
✍
नव पल परिवेश का अहवान हो
अंतर्मन मे नैतिक उत्थान होजीवन है जग मे एक भीषण युद्ध
विजय भाव का मन मे उफान होनिज लक्ष्य मिले हो सबका भला
स्वभाव मे ये गुण सव॔ पहचान होआगाज हो रणकुशलता से सव॔त्र
धरती के कण कण मे मुस्कान होवैचारिक शक्ति से अलख जगाओ
कम॔शीलता का नया निशान हो
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍
( दिनांक 02-04-2018) -
अंदाज
✍? (अंदाज ) ?✍
——($)—–
✍
बिषमताओ से टकराना जरूरी है
संघर्ष के जल से नहाना जरूरी हैजीवन है गतिमान लय का रूप
जिंदगी मे संवर जाना जरूरी हैप्रतिकूलता है वक्त का इम्तहान
समय मे निखर जाना जरूरी हैन हो कुंठित निराशा से ङर कर
आशा को ऊर मे लाना जरूरी हैशिक्षा का उद्देश्य है नव परिवर्तन
विकृत का पल ढहाना जरूरी हैतू ऊर्जावान है आज का अर्जुन
परिवेश मे बदलाव लाना जरूरी है
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍
(दिनांक 01-04-2018) -
अंदाज
✍?अंदाज ?✍
——-($)——
✍
आलस्य न प्रमाद धर
तनाव न अवसाद धरऊमंग रख नस-नस मे
उत्साह का स्वाद रखतरुणाई की बेला है
जीत भाव आगाध रखसंघर्ष से घबरा नही
तरंगित शंखनाद रखजीवन की परिभाषा गढ
सकारात्मकता साथ रखरोग भय न कष्ट से डर
दृढ़ता का तप साध रख
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
(दिनांक 28-03-2018) -
अर्जुन
✍? अर्जुन ?✍
✍
अ– अन्याय /अनैतिकता विरोधी
न्याय नैतिकता संपोषक ।।
र– रक्षक मानवीय संवेदना
सव॔धर्म समभाव संरक्षक ।।
जु — जुझारू कम॔शील न्यायिक
मानवता समरसता घोषक।।
न– नमनीय जीवन चरित्र बनाके
परमार्थ का पथ प्रदर्शक ।।“”उद्घोषक “” ✍?श्याम दास महंत ?✍
-
रक्त से सनी धरती लाल देख
✍ ? गजल ?✍
——-($)——-
✍
रक्त से सनी धरती लाल देख
चहुंओर हाहाकार हाल देखसमरसता जल रही धूं धूं कर
सद्भावना है बदहाल देखहिंसा आतंक का है जोर प्रबल
छल-कपट का रुप विकराल देखभयाक्रांत भयावह आज स्थिति
नैतिकता की घायल चाल देखसाम्प्रदायिकता बन बैठा है नाग
सव॔धर्म समभाव है तंगहाल देखतू बन नही कायर आज अर्जुन
पुरुषार्थ जगा वक्त संभाल देख
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍?⭐??⭐?✍
(दिनांक 27-03-2018) -
तू ही हैअर्जुन आवाज सुन
✍? गजल ?✍
✍
तू ही हैअर्जुन आवाज सुन
परिवेश का दर्दे साज सुनछटपटा रही धरती देख तू
माहौल का क्रंदन आज सुनतेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान
नव नीति का रम्य नाज सुनहिंसा भय दहशत का है आलम
पीड़ित मानवता का राज सुनबिलखती धरा को उबारने तू
पुरुषार्थ का अपना अंदाज चुन
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग) -
गजल
✍? गजल ?✍
—–(*)—–
✍
जग मे कुछ कर जाना जरूरी है
जीवन मे मुस्कुराना जरूरी हैचाहे हो कष्ट संकट गहनतम
धैर्य से निकल जाना जरूरी हैजग का काम है करना अवरोध
बुद्धि से पार पा जाना जरूरी हैहर नेक काम का होता है विरोध
समझ से निखर जाना जरूरी हैमानव का लक्ष्य है आगे बढना
मनोबल से राह पाना जरूरी है
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍????✍ -
आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔
✍? गजल ?✍
——-($)——-
✍
आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔
संत साधुओ को तारो निस्वार्थबिलखता पल विषाक्त क्षण मे
विषैले हवाओ को टारो साक्षाथ॔छल-बलयुक्त विकृत इस दौर मे
दिखाओ अपना सच्चा पुरुषार्थहो बसुंधरा के तुम ही पुत्र सपूत
चले आओ धर वीरता गुणाथ॔सत-सज्जनो की सुनो आवाज
सिसकती धरती पे करो कृतार्थईमान और बेईमानी के इस रण मे
ऊठा गांडीव करने आओ परमाथं
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग )
✍????✍ -
प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है
✍?गीत ?✍
✍
प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है।
तू ही आरजू है तू ही मीत है।।
रस्मे वफा की कसम
तेरी याद है इस दिल मे
सिवा नही कोई मेरे
चाहत-ए-महफिल मे मेरे ख्वाहिश है तू तू ही गीत है । प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।।
मेरी मुस्कान जानेजां
मेरा तू ही नसीब है
मन मे जो बसाया हूं
वही ख्याले हबीब है
मेरे नगमा-ए-नूर तू संगीत है।
प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।।
उम्मीद की किरण मेरी
मेरी नयन का सुकून तू
तू ही ख्वबो-खयाल मेरे
ऊमंगो का नव जुनून तू
मेरी महबूबा दिलबर मनमीत है।
प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।।
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍??????✍ -
सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है
✍? गजल ?✍
—–($)—–
✍
सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है
ईमान बेईमान के बीच लड़ाई हैइंसान का इंसान मे नही विश्वास
मानव का मानव के बीच खाई हैपरिवेश मे घुला है जहर ही जहर
वर्तमान के देह मे पीड़ा समाई हैदुष्ट दुष्कर्मो का बढ रहा सम्मान
शरीफो की स्थिति यहाॅ बेहयाई हैबना हुआ है भूमि का ठौर कुरुक्षेत्र
संघर्ष की नियति देखो मुस्कुराई हैऊठ जाग ! अर्जुन ताड ले हालात
अब घड़ी परीक्षा की तेरी आई है
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
✍?⭐??⭐?✍ -
मेरी जिंदगी का निखार तू है
✍? गजल ?✍
——-($)——-
✍
मेरी जिंदगी का निखार तू है
मेरी मुस्कान का प्रसार तू है
तेरी चाहत का मै हूं दिवाना
मेरी मुहब्बत का आधार तू है
मेरी कल्पना तमन्ना मेरी तू
मेरी तबस्सुम का संसार तू है
मेरी महबूबा मेरे दिलबर है तू
मेरे गुले गुलशन का बहार तू है
तू मेरी है नस-नस मे बसी
मेरे जीवन का उल्फते यार तू है
✍
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
(दिनांक 24-03-2018)
✍?⭐??⭐?✍ -
तेरी नयन मदभरी गजब
? गजल ?
✍
तेरी नयन मदभरी गजब
तेरी अदाएं रसभरी गजब
मुस्कानो की पहचान नई
तेरी सदाएं खरी-खरी गजब
अंगड़ाई मे खिली मोहकता
तेरी जुबां मे प्रीत भरी गजब
चाहत मे ढला ईशक नवल है
तेरी नैनो नजर सरसरी गजब
मेरे प्यार की है तू ख्वाहिश
महबूबा तेरी जादूगरी गजब
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग ) -
पाण्डव सा धैर्य धर्म मे संवरिए
? गजल ?
पाण्डव सा धैर्य धर्म मे संवरिए
कौरव सा न अधम॔ मे संघरिए
सांसारिक खुशी चाह के लिखे
बेईमानी का न दामन धरिए
सत्य सच्चाई संसार का है सुख
निज को पहचान खुद निखरिए
स्वयं की मेहनत मे है भविष्य
कम॔ पूजा की सार्थकता पसारिए
अपने पथ-माग॔ खुद तय करना है
आत्मविश्वास से स्वंय को परखिए
तुम्हारी पहचान तुम्ही से ही है
स्वंय को जान सत्य का संग धरिए
श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग ) -
सावन का मुग्ध फुहार तू है
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।
बूंदो की रमणीक धार तू है ।।
कोमल वाणी मे खिली,
आह! लचक सुरीली ।
खनकती बोली मे ढली,
ओह!आवाज सजीली
सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
हवा की मादकता मधुर,
सरसराहट मे निखरी अजब,
बदन मे ऊमंग की सजी,
कशमकशाहट अजब।।
सावन की बेला साकार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
पानी मे नहाया यौवन,
सांसो मे रफ्तार बढाये।
दृश्य सावन मे लाजवाब,
मन मे चाहते प्यार जगाये ।
सावनी बारिशकी रसधार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
-
क्षणिका
क्षणिका ?:–
✍
जब गम सताता है,
गाने मैं गुनगुनाता हूं ।
जब ददं रुलाता है,
तराने मैं सजाता हूँ ।।
(1)
जब रंज बढ आता है,
रंगीला मन मै हो जाता हूं ।
जब जख्म गहराता है,
मस्ती मगन मै बो जाता हूँ।।
(2)
देती है पीड़ा जब चुभन,
चुप्पी का राग बन जाता हूं ।
व्यथा करती है जब भी आहत,
प्यार का पराग बन जाता हूँ ।।
(4)
मालूम है मुझे इंसान हूँ मैं!
मानवेत्तर ताग बन जाता हूँ ।
मिलती है चुनौती जब संघर्ष की करमो का आग बन जाता हूँ।।
????
✍✍✍✍✍✍
श्याम दास महंत
घरघोडा (रायगढ )
दिनांक 08 -03 -2018 ✍ -
अटल अविचल धर पग बढ़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ़ नारी
जीवन मे नव इतिहास गढ़ नारी
नारी है तू यह सोच न कमतर
कम॔ कर तू अभिनव हटकर
तुझसे बंधा है सुख परिवार का
सव॔ सुख दे सदा तू श्रेयस्कर
आत्मबल से लक्ष्य पकड़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ नारी
उलझन तनाव डिप्रेशन अवसाद
जिंदगी की महज परीक्षा है
उत्तीर्ण हो सदा सजग बनकर
यही सम्पूर्ण नारी शिक्षा है
धीरज से मंजिल राह पकड़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ नारी
जननी माता बहन बेटी तू ही
पत्नी प्रेयसी तेरा रूप अनेक
बिन तेरे सुना है सव॔ जहान
निज अंदर यह भाव तू देख
कम॔ से मर्यादा शिक्षा जकड़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ नारी ????✍✍✍✍✍
श्याम दास महंत
घरघोडा (रायगढ )
दिनांक 8-3-2018 (?) -
गीत
–:?गीत ?:-
✍
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।
बूंदो की रमणीक धार तू है ।।
कोमल वाणी मे खिली,
आह! लचक सुरीली ।
खनकती बोली मे ढली,
ओह!आवाज सजीली
सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
हवा की मादकता मधुर,
सरसराहट मे निखरी अजब,
बदन मे ऊमंग की सजी,
कशमकशाहट अजब।।
सावन की बेला साकार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
पानी मे नहाया यौवन,
सांसो मे रफ्तार बढाये।
दृश्य सावन मे लाजवाब,
मन मे चाहते प्यार जगाये ।
सावनी बारिशकी रसधार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
????
✍✍✍✍✍
श्याम दास महंत
घरघोडा (रायगढ )
✍✍✍✍
दिनांक 09-03-2018
—“”?”— -
गीत
–:?गीत ?:-
✍
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।
बूंदो की रमणीक धार तू है ।।
कोमल वाणी मे खिली,
आह! लचक सुरीली ।
खनकती बोली मे ढली,
ओह!आवाज सजीली
सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
हवा की मादकता मधुर,
सरसराहट मे निखरी अजब,
बदन मे ऊमंग की सजी,
कशमकशाहट अजब।।
सावन की बेला साकार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
पानी मे नहाया यौवन,
सांसो मे रफ्तार बढाये।
दृश्य सावन मे लाजवाब,
मन मे चाहते प्यार जगाये ।
सावनी बारिशकी रसधार तू है ।
सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।
????
✍✍✍✍✍
श्याम दास महंत
घरघोडा (रायगढ )
✍✍✍✍
दिनांक 09-03-2018
—“”?”—
