Shyam Das, Author at Saavan's Posts

गीत होठो पे समाने आ गये है

गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये दे रहे है भाव ले के तान भाने आ गये है ? चाव गाने का हमारा है नही पर भाव ले के चाव छाने आ गये है ? आज मेरा दौर फीका भी नही है बात मीठी सी सुझाने आ गये है ?श्याम दास महंत ? »

जवानी हाय इठलाने लगी है

जवानी हाय इठलाने लगी है जुबां पे आह सी आने लगी है हमारी चाह भडका के अदाये तुफानी प्रीत भडकाने लगी है उठी है प्रीति अंग-अंग मे नशीली खिला के राग चहकाने लगी है हया ऊठा के रग-रग मे सदायें नवेली रीति दे जाने लगी है नई आहे दिखा के जोश लावे तुफां ताने जुबां पे गाने लगी हैं ✍ श्याम दास महंत✍ (दिनांक 19-06-2028) »

न करो चमन की बरबाद गलियां

✍?अंदाज ?✍ ——-$——– ✍ न करो चमन की बरबाद गलियां कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँ पुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना बागो मे खिलाना मोहक तितलियां आगाज करो नव राह बदलाव के गुलशनो मे रहे सुकून की डलियां माली हो तुम करो महसूस यहां समझो सृजन की सत्य पहेलियां मासूम वृक्ष लताएं हैं सव॔ धरोहर फैलने दो इनकी मंत्रमुग्ध लडियां संस्कार धरो प्रकृति का मान रखो धरती पे निखारों मानवीय कडिया... »

नूर हो तुम आफताब हो तुम

✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ नूर हो तुम आफताब हो तुम लहर हो तुम लाजवाब हो तुम मेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ दिलकश गजब शबाब हो तुम जिसे समझा मैने दिल से अपना मुक्कमबल सच्चा ख्वाब हो तुम देख कर चढता है नशा मुझमे दिलकश नशीली शराब हो तुम हर दिन पल तुझको पढता हूं मै सुकून भरी मेरी किताब हो तुम ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍??????✍ (दिनांक -25-04-2018) »

उठ जाग मत थक हार इंसान तू

✍?(अंदाज )?✍ ———-$———- ✍ उठ जाग मत थक हार इंसान तू मानवीय औकात निखार इंसान तू है तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तू मानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ स्व पहचान कर रख धार इंसान तू तेरा कम॔ चरित्र गुण की हो पूजा अपना शौर्य सूर उबार इंसान तू विकृत परिवेश प्रथा हालात हटा बुध्दि शक्ति से कर वार इंसान तू ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍????... »

घोर कलियुग है देख पाप प्रबल

✍?(अंदाज )?✍ ———$——- ✍ घोर कलियुग है देख पाप प्रबल चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित मन मे मैल देख बेईमानी सबल स्वभाव मे मिठास बोली मे छल दिखावा ठोस देख बुध्दि मे नकल कपट भाव है अंतस मे रचा-बसा आचरण मे नाटक का देख अकल आपसी मेल मिलाप मे छुपा स्वाथं मानव मे चाल देख कुटिल सफल ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍??????✍ (दिनांक -26-04-2018) »

विषाक्त है आज परिवेश देख।

✍?(गीताज) ?✍ ———$—— ✍ विषाक्त है आज परिवेश देख। आक्रोश मे सुप्त आवेश देख।। कण कण मे है गुस्सा आलम मे नव क्रोध है धरती कुम्हला रही क्षण मे चढा अवरोध है पल बना है द्रोही खाके ठेस देख। विषाक्त है आज परिवेश देख ।। नजारो मे अहम तीव्र बचनो मे झूठ फरेब चापलूसी चलन मे तेज रौब मे अकड ऐठ ऐब दिखावा काढ़े बैठा है भेष देख । विषाक्त है आज परिवेश देख ।। मानवता है पीड़ित इंसानियत है ... »

विष मय है आज देख परिवेश।

✍?(गीताज ) ?✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है विद्रोही खाके ठेस । आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। नजारो मे अहम बचनो मे फरेब चापलूसी मे बैठा ठाठ अकड ऐठ ऐब घृणित मंजर काढ़े बैठा है भेष । आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। मानवता है पीड़ित इंसानियत है बुझी मानव देख है वेबश ... »

न हताश रख न उदास रख

✍? ( अंदाज ) ?✍ —–$—‘ ✍ न हताश रख न उदास रख जिंदगी मे बस तू आस रख प्रतिकूलता से न तू डर कभी हौसला जीवन मे खास रख असफता पल है निखार का निज पे हिम्मत विश्वास रख संघर्ष के बिना जीवन है अधूरा हर दिन एक अभिनव प्रयास रख जिंदगी का नाम है ईक अध्याय अपने अंदर बस तू इतिहास रख ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ (दिनांक -11-04-2018) »

जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए

✍?(अंदाज)?✍ —–$—– ✍ जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए रूठना मनाना क्रम है जीवन का रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है नेह का श्रद्धा आपार जिंदा रखिए बुराईया कटुता है मन का कचरा मंशा मे शुद्धता सार जिंदा रखिए सबको मिले संसार की हर खुशी ऐसा सात्विक विचार जिंदा रखिए खुद से मिले इंसान को प्रसन्नता धारणा ऐसी बेशुमार जिंदा रखिए ✍ श्... »

विकराल बन तू महाकाल बन

✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ विकराल बन तू महाकाल बन मिसाल बन तू बेमिसाल बन अनंत अकूत अद्भुत साहस धर प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बन बुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बन सभ्यता संस्कार रहे सुरक्षित सदा सौहार्द्र समन्वयक शुद्ब बहाल बन मानव की मानवता सम्मान बचा स्वयं उत्तर बन तू नही सवाल बन ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ (दिनांक -06-04-2018 »

दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए

✍?(अंदाज) ? —–($)—- ✍ दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए गम मे भी खिलखिलाना सीखिए उलझने आये चाहे जितने भी रंज मे भी मचल जाना सीखिए संताप है सब प्रारब्ध कर्मो का यह समझ सब्र लाना सीखिए लक्ष्य चुन मंजिल को पा जाओ सफलता तक खुद जाना सीखिए जीवन का गहरा अथ॔ समझकर जिंदगी सफल निभाना सीखिए आदश॔ बने यह जीवन अर्जुन प्रेरणा जग को दे जाना सीखिए ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ (दिनांक... »

हौसला बुलंद रखो धीर मन मे

✍?(अंदाज ) ?✍ —–($)—- ✍ हौसला बुलंद रखो धीर मन मे आयेगी बहार जरूर चमन मे नैराश्य को सदा ध्वस्त करो मेहनत संवारो हमेशा तन मे सर्वोच्चता सिध्द सव॔ श्रेष्ठ करो उत्साह रखो पल-पल यौवन मे सत्य धर्म न्याय उपासना बने सेवा परोपकार रहे जीवन मे कम॔ शुद्ध रख सहज लक्ष्य साधो मिलेगी सफलता ध्येय नव रण मे ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ(छग) ✍??????✍ ( दिनांक – 05-04-2018) »

विद्रूपता का सव॔ विनाश करो

✍? (अंदाज ) ?✍ ——-($)—— ✍ विद्रूपता का सव॔ विनाश करो कण -कण मे दृढ विश्वास भरो शौर्यशिलता का प्रतीक तुम बुद्धि मे विवेक गुण खास धरो चिंतन करो स्वास्थ्य मंथन करो सुखद सम्भाव रहे प्रयास करो घृणित बुराईयो का न वास रहे मानवीय समझ मे हर उजास भरो कम॔शीलता की गढ परिभाषा नई शुद्ध मानवीय औकात पास रखो टूटे गिरे को देकर जीवन पथ नया पथभ्रष्टो मे सच्चाई सुवास भरो ✍ श्याम दास महंत घरघोडा... »

नव पल परिवेश का अहवान हो

✍? (अंदाज )?✍ ✍ नव पल परिवेश का अहवान हो अंतर्मन मे नैतिक उत्थान हो जीवन है जग मे एक भीषण युद्ध विजय भाव का मन मे उफान हो निज लक्ष्य मिले हो सबका भला स्वभाव मे ये गुण सव॔ पहचान हो आगाज हो रणकुशलता से सव॔त्र धरती के कण कण मे मुस्कान हो वैचारिक शक्ति से अलख जगाओ कम॔शीलता का नया निशान हो ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍??????✍ ( दिनांक 02-04-2018) »

अंदाज

✍? (अंदाज ) ?✍ ——($)—– ✍ बिषमताओ से टकराना जरूरी है संघर्ष के जल से नहाना जरूरी है जीवन है गतिमान लय का रूप जिंदगी मे संवर जाना जरूरी है प्रतिकूलता है वक्त का इम्तहान समय मे निखर जाना जरूरी है न हो कुंठित निराशा से ङर कर आशा को ऊर मे लाना जरूरी है शिक्षा का उद्देश्य है नव परिवर्तन विकृत का पल ढहाना जरूरी है तू ऊर्जावान है आज का अर्जुन परिवेश मे बदलाव लाना जरूरी है ✍ श्याम द... »

अंदाज

✍?अंदाज ?✍ ——-($)—— ✍ आलस्य न प्रमाद धर तनाव न अवसाद धर ऊमंग रख नस-नस मे उत्साह का स्वाद रख तरुणाई की बेला है जीत भाव आगाध रख संघर्ष से घबरा नही तरंगित शंखनाद रख जीवन की परिभाषा गढ सकारात्मकता साथ रख रोग भय न कष्ट से डर दृढ़ता का तप साध रख ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) (दिनांक 28-03-2018) »

अर्जुन

✍? अर्जुन ?✍ ✍ अ– अन्याय /अनैतिकता विरोधी न्याय नैतिकता संपोषक ।। र– रक्षक मानवीय संवेदना सव॔धर्म समभाव संरक्षक ।। जु — जुझारू कम॔शील न्यायिक मानवता समरसता घोषक।। न– नमनीय जीवन चरित्र बनाके परमार्थ का पथ प्रदर्शक ।। “”उद्घोषक “” ✍?श्याम दास महंत ?✍ »

रक्त से सनी धरती लाल देख

✍ ? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ रक्त से सनी धरती लाल देख चहुंओर हाहाकार हाल देख समरसता जल रही धूं धूं कर सद्भावना है बदहाल देख हिंसा आतंक का है जोर प्रबल छल-कपट का रुप विकराल देख भयाक्रांत भयावह आज स्थिति नैतिकता की घायल चाल देख साम्प्रदायिकता बन बैठा है नाग सव॔धर्म समभाव है तंगहाल देख तू बन नही कायर आज अर्जुन पुरुषार्थ जगा वक्त संभाल देख ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍?⭐?... »

तू ही हैअर्जुन आवाज सुन

✍? गजल ?✍ ✍ तू ही हैअर्जुन आवाज सुन परिवेश का दर्दे साज सुन छटपटा रही धरती देख तू माहौल का क्रंदन आज सुन तेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान नव नीति का रम्य नाज सुन हिंसा भय दहशत का है आलम पीड़ित मानवता का राज सुन बिलखती धरा को उबारने तू पुरुषार्थ का अपना अंदाज चुन श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) »

गजल

✍? गजल ?✍ —–(*)—– ✍ जग मे कुछ कर जाना जरूरी है जीवन मे मुस्कुराना जरूरी है चाहे हो कष्ट संकट गहनतम धैर्य से निकल जाना जरूरी है जग का काम है करना अवरोध बुद्धि से पार पा जाना जरूरी है हर नेक काम का होता है विरोध समझ से निखर जाना जरूरी है मानव का लक्ष्य है आगे बढना मनोबल से राह पाना जरूरी है ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍????✍ »

आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔

✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔ संत साधुओ को तारो निस्वार्थ बिलखता पल विषाक्त क्षण मे विषैले हवाओ को टारो साक्षाथ॔ छल-बलयुक्त विकृत इस दौर मे दिखाओ अपना सच्चा पुरुषार्थ हो बसुंधरा के तुम ही पुत्र सपूत चले आओ धर वीरता गुणाथ॔ सत-सज्जनो की सुनो आवाज सिसकती धरती पे करो कृतार्थ ईमान और बेईमानी के इस रण मे ऊठा गांडीव करने आओ परमाथं ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ... »

प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है

✍?गीत ?✍ ✍ प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है। तू ही आरजू है तू ही मीत है।। रस्मे वफा की कसम तेरी याद है इस दिल मे सिवा नही कोई मेरे चाहत-ए-महफिल मे मेरे ख्वाहिश है तू तू ही गीत है । प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।। मेरी मुस्कान जानेजां मेरा तू ही नसीब है मन मे जो बसाया हूं वही ख्याले हबीब है मेरे नगमा-ए-नूर तू संगीत है। प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।। उम्मीद की किरण मेरी मेरी नयन का सुकून तू तू ही... »

सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है

✍? गजल ?✍ —–($)—– ✍ सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है ईमान बेईमान के बीच लड़ाई है इंसान का इंसान मे नही विश्वास मानव का मानव के बीच खाई है परिवेश मे घुला है जहर ही जहर वर्तमान के देह मे पीड़ा समाई है दुष्ट दुष्कर्मो का बढ रहा सम्मान शरीफो की स्थिति यहाॅ बेहयाई है बना हुआ है भूमि का ठौर कुरुक्षेत्र संघर्ष की नियति देखो मुस्कुराई है ऊठ जाग ! अर्जुन ताड ले हालात अब घड़ी परीक्षा की ... »

मेरी जिंदगी का निखार तू है

✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ मेरी जिंदगी का निखार तू है मेरी मुस्कान का प्रसार तू है तेरी चाहत का मै हूं दिवाना मेरी मुहब्बत का आधार तू है मेरी कल्पना तमन्ना मेरी तू मेरी तबस्सुम का संसार तू है मेरी महबूबा मेरे दिलबर है तू मेरे गुले गुलशन का बहार तू है तू मेरी है नस-नस मे बसी मेरे जीवन का उल्फते यार तू है ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) (दिनांक 24-03-2018) ✍?⭐??⭐?✍ »

तेरी नयन मदभरी गजब

? गजल ? ✍ तेरी नयन मदभरी गजब तेरी अदाएं रसभरी गजब मुस्कानो की पहचान नई तेरी सदाएं खरी-खरी गजब अंगड़ाई मे खिली मोहकता तेरी जुबां मे प्रीत भरी गजब चाहत मे ढला ईशक नवल है तेरी नैनो नजर सरसरी गजब मेरे प्यार की है तू ख्वाहिश महबूबा तेरी जादूगरी गजब श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग ) »

पाण्डव सा धैर्य धर्म मे संवरिए

? गजल ? पाण्डव सा धैर्य धर्म मे संवरिए कौरव सा न अधम॔ मे संघरिए सांसारिक खुशी चाह के लिखे बेईमानी का न दामन धरिए सत्य सच्चाई संसार का है सुख निज को पहचान खुद निखरिए स्वयं की मेहनत मे है भविष्य कम॔ पूजा की सार्थकता पसारिए अपने पथ-माग॔ खुद तय करना है आत्मविश्वास से स्वंय को परखिए तुम्हारी पहचान तुम्ही से ही है स्वंय को जान सत्य का संग धरिए श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग ) »

बिन तेरे

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सावन का मुग्ध फुहार तू है

सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। हवा की मादकता मधुर, सरसराहट मे निखरी अजब, बदन मे ऊमंग की सजी, कशमकशाहट अजब।। सावन की बेला साकार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। पानी मे नहाया यौवन, सांसो मे रफ्तार बढाये। दृश्य सावन मे लाजवाब, मन मे चाहते प्यार जग... »

क्षणिका

क्षणिका ?:– ✍ जब गम सताता है, गाने मैं गुनगुनाता हूं । जब ददं रुलाता है, तराने मैं सजाता हूँ ।। (1) जब रंज बढ आता है, रंगीला मन मै हो जाता हूं । जब जख्म गहराता है, मस्ती मगन मै बो जाता हूँ।। (2) देती है पीड़ा जब चुभन, चुप्पी का राग बन जाता हूं । व्यथा करती है जब भी आहत, प्यार का पराग बन जाता हूँ ।। (4) मालूम है मुझे इंसान हूँ मैं! मानवेत्तर ताग बन जाता हूँ । मिलती है चुनौती जब संघर्ष की करमो... »

अटल अविचल धर पग बढ़ नारी

अटल अविचल धर पग बढ़ नारी जीवन मे नव इतिहास गढ़ नारी नारी है तू यह सोच न कमतर कम॔ कर तू अभिनव हटकर तुझसे बंधा है सुख परिवार का सव॔ सुख दे सदा तू श्रेयस्कर आत्मबल से लक्ष्य पकड़ नारी अटल अविचल धर पग बढ नारी उलझन तनाव डिप्रेशन अवसाद जिंदगी की महज परीक्षा है उत्तीर्ण हो सदा सजग बनकर यही सम्पूर्ण नारी शिक्षा है धीरज से मंजिल राह पकड़ नारी अटल अविचल धर पग बढ नारी जननी माता बहन बेटी तू ही पत्नी प्रेयसी त... »

गीत

–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। हवा की मादकता मधुर, सरसराहट मे निखरी अजब, बदन मे ऊमंग की सजी, कशमकशाहट अजब।। सावन की बेला साकार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। पानी मे नहाया यौवन, सांसो मे रफ्तार बढाये। दृश्य सावन मे लाजवाब, म... »

गीत

–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। हवा की मादकता मधुर, सरसराहट मे निखरी अजब, बदन मे ऊमंग की सजी, कशमकशाहट अजब।। सावन की बेला साकार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। पानी मे नहाया यौवन, सांसो मे रफ्तार बढाये। दृश्य सावन मे लाजवाब, म... »