स्वछन्द प्रकृति का इन्सान हूं लेकिन नहीं चाहता मेरे कारण कोई रोये
मुझे अपने ढंग से जीना पसंद है, बंधनों में बंधने की मेरी आदत नहीं
थोडा मुंहफट हूँ, सोच समझ कर जवाब कम, प्रतिक्रिया ज्यादा देता हूँ
कोई मेरी निजता में झांके, मेरे भीतर टटोले, ये मुझे कतई बर्दाश्त नहीं
सदियों से प्रचलित सामाजिक परम्पराओं का अनुकरण मुझसे नहीं होता
परिवर्तन में अगाध विश्वास है मेरा, आँखें बंद रखना मेरी फितरत नहीं
अपने, रिश्तेदार और दोस्तों के बीच, अनचाहा रहूँ ऐसी मेरी चाहत नहीं
नियम और शर्तों के पहरों संग सम्बंधों को निभाने की मुझे आदत नहीं
सभी की निजता का सम्मान करता हूँ, बोझ बनना मेरी फितरत नहीं
घर से जरूरत में ही निकलता हूँ, बेवजह भीड़ बनना मेरी चाहत नहीं
भिन्न विचारधारा थोपने वाले लोगों से अपना रास्ता बहुत दूर रखता हूँ
लेकिन इसके वावजूद भी, कोई मुझे नश्तर चुभोये, कतई बर्दाश्त नहीं
दौलत से अमीर ना सही, परायी ख़ुशी देख ललचाना मेरी फितरत नही
मेरी सारी उम्मीदें अपने आपसे हैं, किसी और से मेरी कोई चाहत नही
जीवन के पथ पर औरत और मर्द दोनों के समान हकों का समर्थक हूँ
परिवार में बेटों को बेटियों से ज्यादा अहमियत मिले, मेरी आदत नहीं
कम मिलना जुलना, अपने आप में रहना, मेरी फितरत है अहंकार नहीं
“योगी” नासमझ जमाना ये समझता है जैसे मुझे किसीसे सरोकार नहीं
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