ऊँगली

अब एन्टिना कोई घुमाता नहीं,
छत पर यूँहीं कोई जाता नहीं,
बैठे रहता हर एक यहां फैल कर,
अब रिमोट से ऊँगली हटाता नहीं।।
राही (अंजाना)

Comments

3 responses to “ऊँगली”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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