खिलौना समझ कर ज़िन्दगी से देखो खेलने लगे,
चुप रहने वाले भी देखो ज़रा कितना बोलने लगे,
चौपाल लगाते दिख जाते थे गाँव में जहाँ तहाँ जो,
आज साथ रहने वाले भी देखो अकेले डोलने लगे,
मिसाल बन जाते थे जब अजनबी दो मिल जाते थे,
अब सगे सम्बंधों में भी लोग देखो रिश्ते तोलने लगे,
समय लगा बहुत जद्दोजहद लगी मनाने में जिनको,
वो खुद ब खुद आकर आज दिल के राज़ खोलने लगे।।
राही (अंजाना)

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