फुलझड़ियाँ

 

आसमाँ छोड़ जब ज़मी पर उतरने लगती हैं फुलझड़ियाँ,
हाथों में सबके सितारों सी चमकने लगती हैं फुलझड़ियाँ

दामन अँधेरे का छोड़ कर एक दिन ऐसा भी आता है देखो,
जब रौशनी में आकर खुद पर अकड़ने लगती हैं फुलझड़ियाँ,

अमीरी गरीबी के इस भरम को मिटाने हर दीवाली पर,
दुनियाँ के हर कोने में बिजली सी कड़कने लगती हैं फुलझड़ियाँ।।

– राही (अंजाना)

Comments

3 responses to “फुलझड़ियाँ”

  1. राम नरेशपुरवाला

    वाह

Leave a Reply

New Report

Close