कोई जमीन अभी भी है जहां मैं अभी तक गया नहीं हूं
कोई आकाश बचा है अभी भी जहां मुझे पहुंचना है
दो परतों के दरम्या मैं ठहरा हआ
अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना…
अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना है
Comments
4 responses to “अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना है”
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nice poetry..बदलाव का बीज..nice
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thanks bro
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वाह बहुत सुंदर
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दो परतों के दरम्या मैं ठहरा हआ
बहुत खूब
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