दमन चक्र में घिरे हुए नर की व्यथा कौन कहे
शोषित होती नारी के, आसूओं में कौन बहे
दिखती है अंधी दुनिया मुझे अपने चारो ओर
ऐसी परायी दुनिया में बोलो कौन रहे ??
दमन चक्र में घिरे हुए नर की व्यथा कौन कहे
Comments
7 responses to “दमन चक्र में घिरे हुए नर की व्यथा कौन कहे”
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nice
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Thanks
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nice line! 🙂
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Thanks
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Thanks Sagar ji
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वाह बहुत सुंदर
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बहुत खूब
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