दोहा

फूटी मटकी रख दयी, माटी लेप लगाय
पानी पल पल रिस रहा, मन भी धोखा खाय।

अशोक बाबू माहौर
10 /12 /2018

Comments

5 responses to “दोहा”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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