दिलों के तार

दिल जोड़ने वालों ने ही दिलों के तार काट दिए,
खिलौनों से खेलने वाले बच्चों के यार काट दिए,

ब मुश्किल ही बचे थे चन्द किस्से इस बचपन के,
सुना है उसके भी किसीने पन्ने दो चार काट दिए।।
राही अंजाना

Comments

5 responses to “दिलों के तार”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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