हसीनों की वादियों में

हसीनों की वादियों में बदसूरतों को भी रहने दीजिए,
दर्द कितना है फ़िज़ाओं में ज़रा हमें भी सहने दीजिए !
जानते हैं वक़्त है आपका पर हमें भी थोड़ी पनाह दीजिए,
मारना है तो फिर मार डालना बस कुछ पल तो जीने दीजिए !
हसीनों की वादियों में ……………………………………………………………
बहुत हुआ दीदार अब तो ज़रा सरमा दीजिए,
नहीं बन पड़ रहा तो अनायास ही मुस्करा दीजिए !
आए हैं मेहमान आपके नज़रें तो उठा लीजिए,
इतने भी बुरे नहीं ज़रा दीवाना समझ अपना लीजिए !
हसीनों की वादियों में ……………………………………………………………
चाँद से क्या कोई माँगे ज़रा रोशनी तो दीजिए,
इन झुकी पलकों में कुच्छ पल तो रहने दीजिए !
खूब सूरत आप हैं इसका इल्म तो करा दीजिए,
इन गुलाबी होठों को अब तो हिला दीजिए !
हसीनों की वादियों में ……………………………………………………………

By KS Rathore

Comments

4 responses to “हसीनों की वादियों में”

  1. Devesh Sakhare 'Dev' Avatar
    Devesh Sakhare ‘Dev’

    बहुत सुंदर

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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