मात्र श्रृंगार की ना रहे पराकाष्ठा
इसमें अंगार भी चरम होना चाहिए।
मात्र प्रेम और आसक्ति ना बने कविता
पंक्तियों में वंदे मातरम होना चाहिए।
मुक्तक
Comments
6 responses to “मुक्तक”
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agree!!
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बेशक
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Bahut khub
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Yes
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Thanks all
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Wah
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